अदाणी एग्रो फ्रेश लिमिटेड के प्रवक्ता ने बताया कि अल्टरनेरिया रोग से हिमाचल में सेब की फसल पर व्यापक असर पड़ा है। कंपनी सालों से हिमाचल में सेब खरीद रही है, हमारा दायित्व है कि संकट में हम बागवानों के साथ खड़े रहें। विशेषज्ञों की टीमें गठित कर फील्ड में भेज दी हैं। बागवानों का हर संभव सहयोग किया जाएगा।
माइट, मार्सोनिना रोग के भी लक्षण
प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में सेब के बगीचों में माइट का प्रकोप भी देखने को मिल रहा है। माइट छोटे कीट होते हैं जो पौधों की पत्तियों और फलों से रस चूसते हैं। जिससे पत्तों पर धब्बे पड़ते हैं, पत्ते पीले पड़कर झड़ जाते हैं। बगीचों में मार्सोनिना रोग के लक्षण भी दिख रहे हैं। इस रोग से समय पूर्व पतझड़ होने का खतरा रहता है।
रोग से बचाव के लिए स्प्रे शेड्यूल के अनुसार करें फफूंदनाशक इस्तेमाल
अल्टरनेरिया रोग से सेब की फसल को बचाने के लिए बागवानी विभाग और नौणी विवि ने एडवाइजरी जारी की है। स्प्रे शेड्यूल के अनुसार हर 10 से 15 दिन में फफूंदनाशकों का छिड़काव करने का सुझाव दिया है। विभाग ने मैन्कोज़ेब (600 ग्राम/200 लीटर पानी), हेक्साकोनाजोल 4% + जिनेब 68% WP (500 ग्राम/200 लीटर पानी) या कार्बेन्डाजिम 25% + फ़्लूसिलाज़ोल 12.5% SC (160 मिली/200 लीटर पानी) का उपयोग हर 10 से 12 दिनों के अंतराल पर करने का सुझाव दिया है। उद्यान विभाग के निदेशक विनय सिंह ने बताया कि विभाग ने अपने अधिकारियों को बागवानों को हर संभव सहयोग देने के निर्देश दिए हैं।
कम बारिश से फैला अल्टरनेरिया रोग
सोलन। नौणी विवि के पादप रोग विज्ञान विभाग ने भी प्रदेश के कुछ क्षेत्रों से रिपोर्ट की गई सेब के पत्तों पर बीमारियों के प्रभावी प्रबंधन के लिए सेब बागवानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। वैज्ञानिकों के अनुसार कम बारिश के कारणयह बीमारियां पैदा हुई हैं। उचित दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी है।