सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और विभागों में सेवाएं दे रहे कई ठेकेदार ईपीएफ अधिनियम का अनुपालन नहीं कर रहे हैं। श्रम एवं रोजगार सचिव प्रियंका बसु की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यह मामला उठा है। ऐसे ठेकेदारों पर विभाग कार्रवाई अमल में लाएगा। श्रम एवं रोजगार सचिव प्रियंका बसु ने कहा कि श्रम विभाग की ओर से ईएलआई योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए ईपीएफओ के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा ताकि हिमाचल प्रदेश में अधिकतम नियोक्ता और कर्मचारी इसका लाभ उठा सकें।
बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में इंप्लाइमेंट लिंक्ड इंसेन्टिव (ईएलआई) योजना के क्रियान्वयन की रणनीति बनाना, निर्बाध कवरेज सुनिश्चित करना और हितधारकों, विशेष रूप से संगठित क्षेत्र के नियोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच जागरुकता बढ़ाना है। क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त राकेश कुमार ने बताया कि ईपीएफ कार्यालय शिमला अपने सोशल मीडिया हैंडल पर भी प्रतिदिन ईएलआई योजना का विवरण अपडेट कर रहा है और नियोक्ताओं को भी ईमेल के माध्यम से योजना के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
योजना के भाग-ए के तहत ईपीएफओ में पहली बार पंजीकृत कर्मचारियों को सरकार द्वारा दो किस्तों में 15,000 रुपये तक का एक महीने का ईपीएफ वेतन दिया जाएगा। केवल वे ही लोग पात्र होंगे जिनका एक महीने का वेतन एक लाख रुपये तक है। योजना की पहली किस्त छह महीने की सेवा के बाद देय होगी और दूसरी 12 महीने की सेवा के बाद। योजना का भाग-बी सभी क्षेत्रों में अतिरिक्त रोजगार सृजन के संबंध में है जिसमें विनिर्माण क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस योजना के तहत सरकार द्वारा नियोक्ताओं को दो वर्षों तक अतिरिक्त रूप से नियुक्त कर्मचारियों के लिए प्रतिमाह अधिकतम 3,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा। विनिर्माण क्षेत्र के लिए योजना का लाभ तीसरे एवं चौथे वर्ष के लिए भी दिया जाएगा। श्रम आयुक्त डॉ. वीरेंद्र शर्मा भी बैठक में उपस्थित थे।