सुजलम भारत आईडी एक यूनिक डिजिटल पहचान होगी, जो प्रत्येक गांव के जल आपूर्ति सिस्टम से जुड़ी होगी। इसमें संबंधित गांव के जल स्रोत, पाइपलाइन नेटवर्क, स्टोरेज टैंक, कनेक्शन और सप्लाई की स्थिति जैसी सभी जानकारी दर्ज रहेगी। इससे किसी भी गांव के जल प्रबंधन की पूरी तस्वीर एक क्लिक में उपलब्ध हो सकेगी। पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल में जल स्रोत दूरदराज स्थानों पर हैं और अधिकांश क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति भौगोलिक चुनौतियों से प्रभावित रहती है।
ऐसे में यह आईडी सिस्टम जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, लीकेज रोकने, सप्लाई में सुधार और योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग में मददगार साबित होगा। साथ ही जल स्रोतों में जल स्तर घटने की स्थिति में जल शक्ति विभाग के लिए त्वरित निर्णय लेना आसान होगा। योजना के तहत सबसे पहले गांवों के जल स्रोतों, पाइपलाइन और उपभोक्ताओं का डिजिटल सर्वे किया जा रहा है।
इसके बाद इस डाटा को राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर प्रत्येक गांव को एक यूनिक आईडी प्रदान की जाएगी। पहाड़ी राज्य में इस प्रक्रिया में आ रही तकनीकी दिक्कतों को केंद्र सरकार के साथ साझा किया जा रहा है, जिससे सिस्टम को और बेहतर बनाया जा सके। इस पहल के लागू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति अधिक पारदर्शी और नियमित होगी।
किसी भी तरह की खराबी, लीकेज या सप्लाई बाधित होने की स्थिति में तुरंत पहचान कर समाधान किया जा सकेगा। साथ ही लोगों को जल उपलब्धता की सटीक जानकारी मिलेगी और शिकायत निवारण प्रक्रिया भी तेज होगी।
अधिकारियों की जवाब देही होगी तय
सुजलम भारत आईडी के जरिए हिमाचल के गांवों में जल आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल निगरानी के दायरे में आ जाएगी। हर गांव के जल स्रोत, पाइपलाइन और घरों तक कनेक्शन का डेटा ऑनलाइन उपलब्ध होगा, जिससे खराबी या लीकेज की तुरंत पहचान संभव होगी। यह सिस्टम पारदर्शिता बढ़ाने के साथ अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करेगा। साथ ही, पानी की उपलब्धता और वितरण का सटीक आकलन होने से योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होगा। ग्रामीणों को नियमित जल आपूर्ति का लाभ मिलेगा और शिकायतों का निपटारा पहले से तेज और प्रभावी हो सकेगा।
जल जीवन मिशन 2.0 के तहत हिमाचल प्रदेश में प्रत्येक गांव की सुजलम भारत आर्डडी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। योजना के तहत जल स्रोतों से घरों तक पानी की आपूर्ति का ऑनलाइन रिकॉर्ड रहेगा और निगरानी भी होगी। योजना को लागू करने में पेश आ रही तकनीकी समस्याओं से केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय को अवगत करवाया जा रहा है। - अंजू शर्मा, प्रमुख अभियंता, जल शक्ति विभाग