डॉक्टर की ओर से केवल नाबालिग के प्रसव की सूचना देने से स्वतः पॉक्सो एक्ट की धाराएं लागू नहीं होती। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब पति-पत्नी साथ रह रहे हैं, दोनों का बच्चा है और परिवार खुश है। ऐसे में पति को जेल भेजना या मुकदमा चलाना इंसानियत और न्याय दोनों के खिलाफ है। इससे हंसता-खेलता परिवार बर्बाद हो जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि जब ऐसे मामलों में पत्नी खुद कोर्ट में आकर पति का बचाव करती है और कोई सबूत नहीं बचता, तो निचली अदालतों को तुरंत मामला बंद कर देना चाहिए। हाईकोर्ट ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए पति और उसके परिवार के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद कर दिया है। गौरतलब है कि 3 दिसंबर 2024 में चंबा के एक अस्पताल में एक नाबालिग लड़की डिलीवरी के लिए आई। डॉक्टरों ने उसकी उम्र 18 साल से कम देखकर पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना दे दी। पुलिस ने लड़की के पति और ससुराल वालों पर अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की बेहद सख्त धाराओं में केस दर्ज कर लिया। लड़की और याचिकाकर्ता लड़के ने साल 2024 में अपने-अपने परिवारों की मर्जी से शादी की थी। लड़की ने खुद कोर्ट में कहा कि उसने अपनी पसंद से शादी की है और वह अपने पति के खिलाफ कोई केस नहीं चलाना चाहती।