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हिमाचल: चालू सत्र में सेवानिवृत्ति नहीं लेने वाले 200 शिक्षक बिना मानदेय पढ़ाने को मजबूर, इस योजना पर उठे सवाल

Tue, 03 Feb 2026 06:00 AM IST
अंकेश डोगरा अनिमेष कौशल, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश में करीब 200 शिक्षक पिछले कई महीनों से बिना मानदेय पढ़ाने को मजबूर हैं। क्या है सारा मामला जानें विस्तार से...
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : AI
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए बनाई गई सरकार की साल में एक बार ही सेवानिवृत्ति वाली व्यवस्था खुद सवालों के घेरे में आ गई है। चालू शैक्षणिक सत्र में सेवानिवृत्ति न लेने वाले करीब 200 शिक्षक पिछले कई महीनों से बिना मानदेय पढ़ाने को मजबूर हैं। हालात यह हैं कि सितंबर 2025 के बाद से सेवा विस्तार पर नियुक्त इन शिक्षकों को अब तक मेहनताना नहीं मिला, जबकि स्कूलों में पढ़ाई का पूरा बोझ इन्हीं के कंधों पर है।

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सरकारी नीति के तहत सेवानिवृत्ति आयु पूरी कर चुके शिक्षकों को यदि वे 31 मार्च 2026 तक सेवाएं देते हैं, तो उन्हें वेतन का 50 फीसदी मानदेय दिए जाने का प्रावधान है। इसी व्यवस्था के तहत कई शिक्षकों ने शैक्षणिक सत्र के बीच छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए सेवानिवृत्ति नहीं ली और सेवा विस्तार स्वीकार किया। लेकिन अब वही शिक्षक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। सितंबर 2025 के बाद से सेवाविस्तार पर तैनात शिक्षकों को भुगतान नहीं हो पाया है। कई शिक्षकों ने विभागीय स्तर पर गुहार लगाई, मगर फाइलें नियमों और मंजूरियों के बीच उलझी हुई हैं।

शिक्षकों का आरोप है कि सरकार ने नीति तो बना दी, लेकिन उसके वित्तीय और प्रशासनिक प्रबंधन की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की। सरकार ने यह व्यवस्था इसलिए लागू की थी ताकि शैक्षणिक सत्र के बीच शिक्षकों की सेवानिवृत्ति से स्कूलों में पढ़ाई बाधित न हो। इसी कारण 31 मार्च 2026 को ही सामूहिक सेवानिवृत्ति का फैसला किया गया। मगर जमीनी हकीकत यह है कि जिन शिक्षकों ने इस नीति पर भरोसा किया, वे आज बिना मानदेय काम करने को मजबूर हैं। नियमों के मुताबिक, सेवानिवृत्ति लेने के इच्छुक शिक्षकों को निर्धारित तिथि से कम से कम दो माह पहले विभाग को लिखित सूचना देना अनिवार्य है। कई शिक्षक इस बाध्यता के कारण भी समय रहते फैसला नहीं बदल पा रहे हैं। ऐसे में वे न तो बीच सत्र में सेवानिवृत्ति ले सकते हैं और न ही उन्हें मानदेय मिल रहा है।
 

पेंशन के सहारे ही स्कूलों में सेवाएं दे रहे शिक्षक
चालू शैक्षणिक सत्र के दौरान सेवानिवृत्ति की जगह सेवा विस्तार लेने वाले शिक्षकों में प्रिंसिपल, प्रवक्ता, जेबीटी, एलटी, शास्त्री शामिल हैं। यह शिक्षक वर्तमान में पेंशन के सहारे ही स्कूलों में अतिरिक्त सेवाएं दे रहे हैं। अगस्त 2025 में जारी हुई सरकार की अधिसूचना के अनुसार इन शिक्षकों को पेंशन के अलावा अंतिम देय वेतन की आधी राशि मानदेय के तौर पर दी जानी है। एक अप्रैल 2026 के बाद इन्हें सेवानिवृत्ति से जुड़े सभी अन्य वित्तीय लाभ दिए जाएंगे।
 

जल्द देय भुगतान करे सरकार : प्रिंसिपल
राजधानी शिमला स्थित वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल लालपानी के प्रिंसिपल पवन कुमार सोनी, सरस्वतीनगर नगर सावड़ा स्कूल के प्रिंसिपल नविंद्र केजटा ने बताया कि उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद स्कूलों में सेवाविस्तार के तहत सेवाएं देने की एवज में अभी तक मानदेय जारी नहीं हुआ है। सेवाविस्तार पर नियुक्त सभी वर्गों के शिक्षकों के भी यही हाल है। उन्होंने कहा कि सरकार के आग्रह पर उन्होंने चालू सत्र में सेवानिवृत्ति नहीं लेने का फैसला लिया लेकिन मानदेय नहीं मिलने से निराशा बढ़ गई है। सरकार को जल्द भुगतान करना चाहिए।
 
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मानदेय जारी नहीं होने का किया जाएगा पता : रोहित
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद नियुक्त शिक्षकों को मानदेय जारी नहीं होने का मामला उनके ध्यान में नहीं है। इसके बारे में विभागीय अधिकारियों से पता किया जाएगा। मानदेय जारी नहीं हुआ है तो पड़ताल कर जल्द पैसा जारी किया जाएगा।
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