शेष पात्र विद्यार्थियों को भी आगामी चरणों में यह लाभ दिया जाएगा। प्रदेश में इस योजना के तहत करीब 10 हजार मेधावी विद्यार्थियों का चयन किया गया था। पहले सरकार ने विद्यार्थियों को कूपन के माध्यम से डिजिटल डिवाइस उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनाई थी, लेकिन इसमें अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। अमेरिका और ईरान युद्ध के चलते इलेक्ट्राॅनिक्स उपकरणों की कीमत काफी बढ़ गई थी। इस कारण कंपनियों ने उपकरण देने से हाथ पीछे खींच लिए हैं।
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक केवल 222 विद्यार्थियों ने कूपन का उपयोग कर डिजिटल उपकरण खरीदे हैं। कम प्रतिक्रिया को देखते हुए सरकार ने योजना का स्वरूप बदलते हुए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से राशि देने का फैसला लिया। सरकार का मानना है कि इससे विद्यार्थियों को अपनी आवश्यकता और पसंद के अनुरूप उपकरण चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी, वहीं वितरण प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और सरल होगी। स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने बताया कि बैंक खातों और अन्य औपचारिकताओं का सत्यापन पूरा होने के बाद चरणबद्ध तरीके से सभी पात्र विद्यार्थियों को राशि जारी की जाएगी।