विशेष रूप से निजी कॉलेजों में यह समस्या अधिक गहराई से दिखाई दे रही है। हिमाचल के कई निजी बीएड कॉलेजों में हिमाचल प्रदेश के कोटे और मैनेजमेंट कोटे दोनों में सीटें खाली हैं। निजी कॉलेजों में एचपी कोटे की लगभग 840 सीटें और मैनेजमेंट कोटे की लगभग 179 सीटें खाली हैं। इससे कॉलेजों को शुल्क के रूप में मिलने वाली आय में भारी गिरावट आ रही है। कई संस्थानों का कहना है कि वे अब बीएड कोर्स को अपने पाठ्यक्रम से हटाने पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि कम दाखिले के कारण कॉलेज चलाने का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। कॉलेजों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
कॉलेजों की आर्थिक हालत पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। शिक्षकों की सैलरी, इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य खर्चों को पूरा करने में कॉलेजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई कॉलेजों का कहना है कि अगर अगले सत्र में भी यही स्थिति बनी रही तो वे बीएड कोर्स को बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं देख रहे हैं।