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किसानों को लूटने में लगे बिचौलिये और फुटकर विक्रेता

Fri, 07 Aug 2015 12:30 PM IST
विश्वास भारद्वाज/अमर उजाला, शिमला
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फसल के वाजिब दाम न मिलने से किसानों के लिए सब्जी उत्पादन घाटे का सौदा बन गया है। बेतहाशा महंगाई से आम आदमी परेशान है और फसल तैयार करने वाले किसानों को मेहनत की कीमत तक नहीं मिल पा रही। बिचौलियों और फुटकर विक्रेताओं का गठजोड़ किसानों तथा ग्राहकों पर भारी पड़ रहा है।
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फसल की उचित कीमत न मिलने से परेशान किसानों की शिकायतों पर वीरवार सुबह ‘अमर उजाला’ की टीम मामले की पड़ताल करने ढली सब्जी मंडी पहुंची। मंडी में टमाटर तीन से सात रुपये के बीच बिका।

आसपास के क्षेत्रों से मंडी पहुंचे फुटकर विक्रेताओं ने किसानों की फसल हाथोंहाथ खरीदी। मंडी में तीन रुपये किलो खरीदे टमाटर की कीमत बाजार पहुंचते ही छह गुणा बढ़ गई। ढली मंडी से एक किलोमीटर दूर संजौली बाजार में टमाटर 20 से 25 रुपये किलो बेचा गया।
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एक रुपया कमाकर घर लौटे ताराचंद- रछोल मूलकोटी के किसान ताराचंद का 22 किलो टमाटर तीन रुपये प्रति किलो की दर से 66 रुपये में बिका। ताराचंद ने बताया कि टमाटर की पैकिंग पर पांच रुपये खर्चा आया। मंडी तक टमाटर पहुंचाने का भाड़ा 30 रुपये चुकाया।

मंडी में चाय नाश्ते पर 20 रुपये खर्च हो गए। घर लौटने का 10 रुपये बस किराया लगा। 66 में से 65 रुपये मंडी में ही खर्च हो गए। कमाई के नाम पर सिर्फ एक रुपया लेकर घर लौटना पड़ा।

6 महीने में 3 क्विंटल टमाटर तैयार 2100 में बिका- पटगैहर के मोलक राम ने छह महीने की कड़ी मेहनत के बाद 3 क्विंटल टमाटर तैयार किया। वीरवार को टमाटर 2100 रुपये में बिका। मंडी तक माल पहुंचाने में 500 रुपये खर्चा आया।

टमाटर तोड़ने और पैकिंग में मोलक राम के परिवार को बुधवार रात 12 बजे गए। मोलक राम ने बताया कि मंडी में उनका टमाटर संजौली के एक दुकानदार ने खरीदा। दुकान में कई गुणा अधिक कीमत पर टमाटर बेचा गया।
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