शिमला में निजी बस ऑपरेटरों ने फरवरी में ही न्यायालय के आदेशों के नाम पर न्यूनतम किराया पांच रुपये वसूलना शुरू कर दिया था। ऑपरेटरों ने अपने कंडक्टरों को न्यायालय के आदेशों की प्रति देकर न्यूनतम किराया पांच रुपये वसूलने के आदेश दिए थे। हालांकि, इसे लेकर पब्लिक की नाराजगी के बाद जब परिवहन विभाग ने सख्ती की तो पांच रुपये की वसूली बंद कर दी गई।
ऐसे राहत दे सकती है सरकार- न्यूनतम किराये में बढ़ोतरी के बावजूद आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार न्यूनतम किराये का दायरा तीन किलोमीटर से बढ़ा कर पांच किलोमीटर निर्धारित कर सकती है। मौजूदा समय में न्यूनतम 3 रुपये किराया तीन किलोमीटर तक ही लागू होता है।
इससे अधिक सफर करने पर प्रति किलोमीटर 1.43 रुपये की दर से किराया वसूला जाता है। सूत्रों का कहना है कि सरकार पांच रुपये न्यूनतम किराया तय कर इसका दायरा पांच किलोमीटर तय कर सकती है। ऐसे में पांच किलोमीटर सफर करने पर लोगों को पांच रुपये ही किराया देना होगा।
अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं। चुनाव से ठीक पहले सरकार प्रति किलोमीटर किराया बढ़ाकर लोगों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती। ऐसे में 1.43 रुपये प्रति किलोमीटर से अधिक किराये में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। सरकार का यह भी तर्क है कि हिमाचल में प्रति किलोमीटर किराया पहले ही अन्य राज्यों के मुकाबले काफी अधिक है।
बस ऑपरेटरों की मांग पर विचार किया जा रहा है, लेकिन आम लोगों पर बोझ न पड़े, इसका भी ख्याल रखा जाएगा। किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। जो न्याय संगत होगा, सरकार वही फैसला लेगी। - गोविंद ठाकुर, परिवहन मंत्री, हिमाचल सरकार