प्रदेश में लोकसभा चुनाव में दिव्यांग मतदाताओं ने मतदान में राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य मतदान के प्रतिशत को भी पीछे छोड़ दिया है। यही नहीं, 2017 के विधानसभा चुनावों की तुलना में भी दिव्यांग वोटरों के मतदान में वृद्धि दर्ज की गई है। लोकसभा चुनाव में सामान्य मतदान का राष्ट्रीय औसत 67 और प्रदेश में 72 प्रतिशत था। हिमाचल में दिव्यांग मतदाताओं का वोट प्रतिशत 74 रहा। कांगड़ा में सबसे ज्यादा 91 फीसदी दिव्यांगों ने मतदान किया।
राज्य की सुगम्य चुनाव संचालन समिति के सदस्य और उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने बताया कि दिव्यांग मतदाताओं के वोट प्रतिशत में जबरदस्त बढ़ोतरी राज्य के चुनाव विभाग की ओर से बेहतर प्रबंधन, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल और अच्छे टीम वर्क का परिणाम है।
प्रदेश के कुल 37852 विकलांग मतदाताओं में से 28060 ने वोट डाले और इनमें 5775 दृष्टि बाधित, 4366 मूक बधिर, 19173 शारीरिक विकलांग, 6771 बहुविकलांगता वाले और 1767 बौद्धिक विकलांग शामिल रहे। 2525 बूथ ऐसे थे, जिनमें विकलांग मतदाताओं के नाम दर्ज थे। बताया कि कुल 8972 विकलांग वोटरों को 848 व्हीलचेयरों के जरिए बूथ तक ले जाया गया और चुनाव विभाग के वाहनों में बैठ कर 10347 विकलांग मतदाता वोट डालने पहुंचाया गया।
चुनाव के दौरान दिव्यांगों की भागीदारी शत प्रतिशत करने के लिए चुनावों के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी देवेश कुमार ने समीक्षा बैठक ली। बैठक के दौरान विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे आधा दर्जन दिव्यांग विद्यार्थियों ने भी हिस्सा लिया।
इनमें चुनाव विभाग द्वारा राज्य के लिए यूथ आइकॉन घोषित की गई दृष्टिबाधित छात्रा एवं गायिका मुस्कान और डिसेबल्ड स्टूडेंट्स एंड यूथ एसोसिएशन के प्रदेश संयोजक मुकेश कुमार भी शामिल थे। बैठक में लोकसभा चुनावों में दिव्यांग मतदाताओं के लिए किए गए प्रबंधों की समीक्षा की गई और भविष्य के चुनावों के लिए रणनीति भी तैयार की।
इस अवसर पर देवेश ने कहा कि भविष्य में विकलांग मतदाताओं का शत प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करने के लिए सूक्ष्म स्तर पर योजना बनाई जाएगी। बैठक में अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी दिलीप नेगी, उप निर्वाचन अधिकारी अनिल कुमार, सहायक निर्वाचन अधिकारी हरबंस लाल धीमान, कल्याण विभाग की संयुक्त निदेशक ईशा ठाकुर के अलावा विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।