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हिमाचल: एसजेवीएनएल और बीबीएमबी की ऋण मुक्त परियोजनाओं में मांगी ज्यादा रॉयल्टी

Sat, 10 Jun 2023 07:46 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

 शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने किन्नौर जिले के दौरे के दौरान केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह के समक्ष नाथपा झाकड़ी, रामपुर, भाखड़ा बांध, ब्यास सतलुज लिंक व पौंग बांध परियोजना का मामला उठाया। 
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश सरकार ने एसजेवीएनएल और बीबीएमबी की ऋण मुक्त परियोजनाओं में ज्यादा रॉयल्टी मांगी है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने किन्नौर जिले के दौरे के दौरान केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह के समक्ष नाथपा झाकड़ी, रामपुर, भाखड़ा बांध, ब्यास सतलुज लिंक व पौंग बांध परियोजना का मामला उठाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय संयुक्त उपक्रम सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (एसजेवीएनएल) व भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के अधीन बनाई गई कई परियोजनाएं ऋण मुक्त हो चुकी हैं।

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एसजेवीएनएल की ओर से संचालित नाथपा झाकड़ी परियोजना (1500 मेगावाट) व रामपुर परियोजना (412 मेगावाट) से प्रदेश को केवल 12 प्रतिशत की दर पर मुफ्त बिजली प्राप्त हो रही है, जबकि एसजेवीएनएल को इन ऋण मुक्त हो चुकी परियोजनाओं से पूरा लाभ मिल रहा है। इन परियोजनाओं में अनुबंध अवधि सीमा भी निर्धारित नहीं की गई है। यह प्रदेश हित में होगा कि इन परियोजनाओं में अन्य परियोजनाओं की भांति 40 वर्ष की समय अवधि निर्धारित करने के साथ-साथ मुफ्त बिजली की मात्रा में बढ़ोतरी की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीबीएमबी की ओर से संचालित भाखड़ा बांध परियोजना (1478 मेगावाट), ब्यास सतलुज लिंक (990 मेगावाट) व पौंग बांध परियोजना (396 मेगावाट) में किसी प्रकार की मुफ्त बिजली की रॉयल्टी नहीं दी जा रही है।

इस कारण प्रदेश सरकार को प्राप्त होने वाले राजस्व से वंचित होना पड़ रहा है। केंद्रीय व राज्य सरकार की ओर से पारित ऊर्जा नीतियों में सभी परियोजनाओं से प्रदेश सरकार को मुफ्त बिजली रॉयल्टी के रूप में देने का प्रावधान किया गया है। बीबीएमबी की ओर से इन परियोजनाओं से प्रदेश सरकार को हिस्सेदारी के रूप में केवल मात्र 7.19 प्रतिशत बिजली निर्धारित दरों पर प्रदान की जा रही है, जो पर्याप्त नहीं है। ऐसे में इन परियोजनाओं में भी अन्य परियोजनाओं की भांति मुफ्त बिजली रॉयल्टी के रूप में दी जानी न्यायसंगत होगा। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने मुख्यमंत्री की ओर से उठाए गए मुद्दों पर गंभीरतापूर्ण विचार कर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
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ऊर्जा मंत्री से की एसजेवीएन प्रबंधन की शिकायत
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के समक्ष एसजेवीएनएल की ओर से कार्यान्वयन अनुबंध हस्ताक्षरित किए बिना ही लुहरी चरण-1 (210 मेगावाट), धौलासिद्ध (66 मेगावाट) व सुन्नी बांध (382 मेगावाट) का निर्माण कार्य शुरू करने का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से बार-बार अनुरोध करने के बाद भी एसजेवीएनएल की ओर से अनुबंध हस्ताक्षरित नहीं किया जा रहा है। ऊर्जा नीति में वर्णित प्रावधानों को मानने में भी आनाकानी की जा रही है।

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