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अब ‘लेक्चरर स्कूल न्यू’ नाम से जाने जाएंगे 17 हजार पीजीटी, अधिसूचना जारी

Thu, 29 Aug 2019 12:15 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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सांकेतिक तस्वीर
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नियुक्त करीब 17 हजार पीजीटी (पोस्ट ग्रेजुएट टीचर) अब ‘लेक्चर स्कूल न्यू’ नाम से जाने जाएंगे। उच्चतर शिक्षा विभाग ने पदनाम बदलने की अधिसूचना जारी कर दी है। पदनाम बदलने के बावजूद सरकार ने इन शिक्षकों पर छठी से जमा दो कक्षा तक पढ़ाने की शर्त बरकरार रखी है। जमा एक और जमा दो कक्षा में यह शिक्षक पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान पढ़े विषय पढ़ाएंगे जबकि छठी से दसवीं तक ग्रेजुएशन में पढ़े विषयों को विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे।

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पीजीटी बीते लंबे समय से प्रवक्ता पदनाम देने की मांग कर रहे थे। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों को शिक्षकों ने इस बाबत ज्ञापन सौंपे थे। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ने पालमपुर में आयोजित हुए शिक्षकों के अधिवेशन में पीजीटी को प्रवक्ता पदनाम देने की घोषणा की थी। अब शिक्षा विभाग द्वारा जारी हुई अधिसूचना में प्रवक्ता के साथ स्कूल न्यू नाम भी जोड़ दिया गया है। जिससे शिक्षक भड़क उठे हैं। प्रदेश स्नातकोत्तर अध्यापक संघ ने प्रवक्ता के साथ स्कूल न्यू शब्द जोड़ने का विरोध किया है।

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संघ के अध्यक्ष चितरंजन कालटा ने कहा है कि मुख्यमंत्री ने पदनाम प्रवक्ता करने की घोषणा की थी लेकिन अफसरशाही ने अधिसूचना में स्कूल न्यू शब्द जोड़ कर शिक्षकों के साथ अन्याय किया है। इसके अलावा भर्ती एवं पदोन्नति नियम में भी परिवर्तन नहीं किया है। उन्होंने कहा कि अगर अधिसूचना को दुरुस्त नहीं किया गया तो शिक्षक आंदोलन करने को विवश होंगे। हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने से भी गुरेज नहीं किया जाएगा।

शिक्षा मंत्री के बयान से सीएंडवी शिक्षक नाराज
सौ छात्रों से कम संख्या वाले मिडल स्कूलों में कला व शारीरिक शिक्षकों के पद नहीं भरने के विधानसभा में शिक्षा मंत्री द्वारा दिए गए बयान को लेकर राजकीय सीएंडवी अध्यापक संघ ने नाराजगी जताई है। संघ के अध्यक्ष चमन लाल शर्मा ने कहा है कि अगर मिडल स्कूलों में 60-70 बच्चे हैं तो उनके भविष्य के साथ कैसे खिलवाड़ किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार नियम में हिमाचल की भूगोलिक स्थिति को देखते हुए आरटीई नियम में छूट ली जा सकती है। उन्होंने कहा कि अगर मिडल स्कूलों में इन पदों को भरने की प्रक्रिया जल्द शुरू नहीं की गई तो मजबूरन संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
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