हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में लावारिस कुत्तों व बंदरों की बढ़ती समस्या और उनके काटने की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कड़ा संज्ञान लिया है। खंडपीठ ने कुत्तों व बंदरों के पुनर्वास के लिए एनजीओ की मदद से कैटल पाउंड (पशु आश्रय) जैसी व्यवस्था पर याचिकाकर्ताओं के वकीलों से सुझाव मांगे हैं। उच्च न्यायालय ने कुत्तों और बंदरों के गणना सर्वेक्षण पर हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए हैं और स्पष्ट करने को कहा कि क्या शहरी क्षेत्र में कुत्तों-बंदरों आबादी की कोई गणना की गई है। सुनवाई के दौरान नगर निगम धर्मशाला की ओर से हलफनामा दाखिल किया और बताया कि कुत्तों के संबंध में एक प्रस्ताव बनाया जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने मामले में सुनवाई की। मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी।