प्रतिवादियों का यह भी तर्क था कि वन विभाग में लोक निर्माण विभाग व सिंचाई एवं जन कल्याण विभाग की तरह वर्कचार्ज स्टेटस नहीं दिया जा सकता। वन विभाग ने खुद ही हाईकोर्ट द्वारा विभिन्न मामलों में पारित निर्णयों की अनुपालना में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मूलराज उपाध्याय के मामले में पारित निर्णय का लाभ देते हुए वर्कचार्ज स्टेटस दिए जाने के आदेश पारित कर रखे हैं, प्रदेश प्रशासनिक प्राधिकरण ने राज्य सरकार द्वारा पारित आदेशों को कानून के विपरीत पाते हुए रदद् कर दिया था। हाईकोर्ट के निर्णय के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि प्रार्थी द्वारा दी गई वर्कचार्ज स्टेटस वाली सेवाओं को पेंशन के लिए आंका जाएगा। प्रशासनिक प्राधिकरण ने प्रतिवादियों को यह आदेश दिए थे कि वह 3 माह के भीतर प्रार्थी को पेंशन दें।