याचिकाकर्ता को पांच स्टेशनों की नई सूची हफ्ते में देने के निर्देश
अदालत ने पाया कि विभाग ने याचिकाकर्ता की पसंद के स्टेशनों पर उन कर्मियों पर विचार नहीं किया जोकि लंबे समय से वहां डटे हैं। न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की पीठ ने सविता बनाम हिमाचल प्रदेश जैसे पुराने मामले का जिक्र करते हुए कहा कि कोर्ट ने पहले ही स्थिति स्पष्ट की है कि कठिन क्षेत्रों से आने वाले कर्मियों को उनकी पसंद के स्टेशनों पर प्राथमिकता मिलनी चाहिए। अगर वहां पद खाली नहीं है, तो लंबे समय से टिके हुए कर्मचारी को हटाकर याचिकाकर्ता को वहां तैनात किया जाना चाहिए। अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वह एक हफ्ते के भीतर पांच स्टेशनों की नई सूची विभाग को सौंपे। इन पांच स्टेशनों में से एक स्टेशन दूसरे जिले का अनिवार्य है। अदालत ने सक्षम प्राधिकारी को इस प्रतिवेदन पर दो हफ्ते में निर्णय लेने का आदेश दिया है। कोर्ट के फैसले से उन हजारों सरकारी कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है जो जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में अपनी सेवाएं पूरी करने के बाद मनचाही पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं।