इसमें कहा गया कि राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा हो चुकी है और फिलहाल नामांकन पत्रों की जांच का काम चल रहा है। इस कारण उनका अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना संभव नहीं है। खंडपीठ ने कहा कि इससे पहले जुलाई में भी संसद के मानसून सत्र का हवाला देते हुए कलेक्टर को व्यक्तिगत पेशी से छूट दी गई थी। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने इस बार भी छूट प्रदान कर दी, लेकिन साफ कर दिया कि 23 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में जिला कलेक्टर को हर हाल में व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।
पिछली सुनवाई में राजस्थान सरकार को लगाई थी फटकार
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने पौंग बांध विस्थापितों के पुनर्वास में हो रही देरी और उन्हें दूरदराज के क्षेत्रों में जमीन आवंटित किए जाने पर राजस्थान सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने कहा था कि विस्थापितों को जैसलमेर के रेगिस्तानी इलाकों में भेजने के बजाय हिमाचल प्रदेश के नजदीक फेज-1 क्षेत्रों में जमीन उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
16,352 विस्थापितों के पुनर्वास का मामला
पौंग बांध के निर्माण के लिए वर्ष 1971 में हिमाचल प्रदेश में भूमि अधिग्रहित की गई थी। इसके चलते हजारों परिवार विस्थापित हुए। करीब 16,352 पौंग बांध विस्थापितों के पुनर्वास के लिए राजस्थान के गंगानगर जिले में लगभग 2.20 लाख एकड़ भूमि आरक्षित की गई थी। हालांकि, जनवरी 2025 के बाद अब तक केवल 50 विस्थापितों को ही जमीन आवंटित किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि कई विस्थापितों को अब तक भूमि का मालिकाना हक नहीं मिला, जबकि कुछ को बंजर जमीन आवंटित की गई या बाद में बेदखल कर दिया गया।