याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए ने कोर्ट में तस्वीरें पेश करते हुए बताया कि टॉलैंड क्षेत्र में की जा रही वर्टिकल कटिंग के कारण ऊपरी हिस्से में खड़े हरे-भरे देवदार के पेड़ गंभीर खतरे में आ गए हैं। आरोप लगाया गया है कि सड़क के मोड़ पर सामुदायिक भवन का निर्माण किया जा रहा है, जिससे प्राकृतिक नाले के बंद होने की आशंका पैदा हो गई है। निर्माण स्थल से निकलने वाले मलबे को तयशुदा डंपिंग साइट पर ले जाने के बजाय कनलोग क्षेत्र में अवैध रूप से फेंका जा रहा है। जिस जमीन पर निर्माण कार्य किया जा रहा है, वह प्रकृति से वन भूमि है। इसके लिए उचित अनुमति ली गई थी या नही, और क्या वहां से हरे देवदार के पेड़ों को अवैध रूप से हटाया गया है, इस पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।