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शिमला शहर में हरे पेड़ों को काटने के लिए दी मंजूरी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

Tue, 04 May 2021 11:09 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

प्रार्थी की मांग है कि क्या पेड़ काटने के आवेदनों को संशोधित करते समय मौके की वीडियोग्राफी भी की गई थी या नहीं। क्या पेड़ों को कटाई से बचाने के लिए कोई गंभीर प्रयास किए गए थे।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए नगर निगम शिमला के भीतर हरे पेड़ों को काटने के लिए दी गई अनुमतियों पर रोक लगा दी है। हालांकि कोर्ट ने बिजली बोर्ड को दी गईं अनुमतियों पर यह रोक नहीं लगाई है।  मुख्य न्यायाधीश एल नारायण स्वामी व न्यायाधीश अनूप चिटकारा की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किए। याचिकाकर्ता ने नगर निगम शिमला, वन संरक्षण अधिनियम और अन्य वैधानिक प्रावधानों का उल्लेख करते हुए शिमला शहर में सड़कों के विस्तारीकरण के नाम पर हरे-भरे स्वस्थ पेड़ों को काटे जाने का मुद्दा उठाया है।

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याचिकाकर्ता ने वृक्ष प्राधिकरण समिति द्वारा असंख्य पेड़ों की कटाई के लिए दी गईं अनुमतियों को रद्द करने और पेड़ों की कटाई के सभी मामलों को तय करने तथा निपटाने के लिए बनाई गई कैबिनेट उप समिति के गठन के बारे में जारी अधिसूचना को रद्द करने की मांग भी की है। याचिकाकर्ता ने अनुमतियों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच करवाने की मांग भी की है।  प्रार्थी की मांग है कि क्या पेड़ काटने के आवेदनों को संशोधित करते समय मौके की वीडियोग्राफी भी की गई थी या नहीं। क्या पेड़ों को कटाई से बचाने के लिए कोई गंभीर प्रयास किए गए थे। पेड़ों को काटने के लिए केवल अंतिम उपाय के रूप में अनुमति दी गई थी। याचिकाकर्ता ने अधिकारियों से हरे पेड़ों की अवैध कटाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से रोकने की मांग की है। मामले पर अगली सुनवाई 12 मई को निर्धारित की गई है।

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एसई के डीओ नोट पर तबादला आदेश रद्द

प्रदेश हाईकोर्ट ने सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर ऑपरेशन कांगड़ा सर्कल में तैनात सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर इलेक्ट्रिकल बृज लाल ठाकुर के डीओ नोट पर आधारित तबादला आदेशों को रद्द कर दिया है। प्रार्थी के अनुसार राज्यसभा सांसद के डीओ नोट को आधार बनाकर निजी प्रतिवादी को एडजस्ट करने के उद्देश्य से उसे मौजूदा स्थान से जोगिंद्रनगर सर्कल भेजा जा रहा है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने पाया कि स्थानांतरण आदेश सांसद के जारी डीओ नोट के आधार पर किया गया है। जबकि हाईकोर्ट के विभिन्न मामलों में पारित निर्णयों के दृष्टिगत डीओ नोट के आधार पर जारी स्थानांतरण आदेश कानूनन मान्य नहीं है। 

प्रार्थी का यह भी आरोप था कि उसका तबादला सरकार के स्थानांतरणों पर बैन लगाने के बावजूद किया गया है। इतना ही नहीं, जिस प्रतिवादी अधिकारी को उसके स्थान पर एडजस्ट किया जा रहा है उसका गृह जिला कांगड़ा होने के कारण भी उसे प्रार्थी के स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने यह पाया कि स्थानांतरण आदेश पूरी तरह से राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते किए गए हैं।  न्यायालय ने स्थानांतरण आदेशों को कानून के विपरीत पाते हुए रद्द कर दिया।
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