न्यायालय ने इनके उपचार के लिए ग्रामीण स्तर पर जागरूकता शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए हैं ताकि मानसिक रोग से पीडि़त व्यक्तिका इलाज हो सके। ऐसे लोगों को समाज में समान अधिकार देने की आवश्यकता है।
ऐसे शिविर में मनोचिकित्सक, वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भाग लेने के आदेश जारी किए हैं। न्यायालय ने राज्य विधि सेवा प्राधिकरण, जिला विधि सेवा प्राधिकरण को मनोचिकित्सा अस्पतालों, नर्सिगिं होम्स के संगठनों के सहयोग से स्पेशल लीगल एड क्लीनिक स्थापित करने के आदेश जारी
किए हैं, जोकि मानसिक रोग से पीडि़त व्यक्ति के परिवार के सदस्यों को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी दे सके। प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए हैं कि वह मानसिक तौर पर पीडि़त लोगों की सहायता के लिए यह सुनिश्चित करें कि सभी जिला में वेब पोर्टल चालू स्थिति में हो।
इनकी सहायता के लिए सभी टोल फ्री नंबर को भी चालू रखने के आदेश दिए हैं। इन फोन नंबरों को हमेशा एक व्यक्ति अटेंड करता रहे जहां पर मानसिक तौर पर पीडि़त व्यक्ति को रखा गया हो, उसके लिए रहने और खाने के लिए पूरी व्यवस्था हो।