हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर की भर्ती प्रक्रिया का परिणाम घोषित करने के दिए आदेश हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किए। मामले की अगली सुनवाई अब 29 मार्च को निर्धारित की गई है। याचिकाकर्ता वनीता सुपहिया ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने गत 12 दिसंबर को विश्वविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। दलील दी गई कि 19 जुलाई 2022 को विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षकों और गैर शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसके तहत याचिकाकर्ता ने सहायक प्रोफेसर के पद के लिए आवेदन किया। 9 नवंबर 2022 को उसका साक्षात्कार लिया गया। सहायक प्रोफेसर के पद को छोड़कर लगभग सभी पदों के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि नई सरकार के सत्ता में आते ही विश्वविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाई है। याचिकाकर्ता के अनुसार 24 दिसंबर 2022 को विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार से परिणाम घोषित करने की अनुमति मांगी गई। अभी तक सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
हाईकोर्ट ने खारिज की फर्जी एलआईसी एजेंट की अग्रिम जमानत
वहीं, हाईकोर्ट ने जाली पॉलिसी देकर ढाई लाख रुपये की चपत लगाने वाले फर्जी एलआईसी एजेंट की अग्रिम जमानत खारिज कर दी है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए यह निर्णय सुनाया। याचिकाकर्ता विजय कुमार शर्मा पर अंब में फर्जी एलआईसी एजेंट बन कर लोगों से धोखाधड़ी करने का आरोप है। पुलिस की ओर से पेश की गई रिपोर्ट पर अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता ने एलआईसी के नाम पर पैसे ऐंठने के लिए अन्य लोगों को भी काम पर लगा रखा था। शिकायतकर्ता रक्षा देवी ने 14 जनवरी 2023 को इसके बारे में पुलिस को शिकायत दी थी। शिकायत की गई थी कि आरोपी ने उससे ढाई लाख रुपए एलआईसी पॉलिसी के नाम पर लिए। इस बीमे की अवधि 25 फरवरी 2020 से 25 फरवरी 2021 तक बताई गई। पॉलिसी की अवधि पूरी होने पर शिकायतकर्ता को 2 लाख 80 हजार मिलने का वादा किया गया था। जब प्रार्थी से यह रकम मांगी गई तो वह इस रकम को देने में आनाकानी करने लगा। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अपने स्तर पर एलआईसी से जांच पड़ताल करवाई तो पता चला की उसे दी गई एलआईसी पॉलिसी फर्जी है। पुलिस जांच में पाया गया कि प्रार्थी 31 अक्टूबर 2010 से एलआईसी एजेंट तो था परंतु बाद में उसने एलआईसी छोड़ दी थी।