अतिक्रमण मामले में अब अघली सुनवाई 10 मई को
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। लोअर बाजार शिमला में अतिक्रमण पर हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने पुलिस बल के जरिये अतिक्रमण और ओवर हैंगिंग हटाने के आदेश दिए हैं।
अदालत ने एसपी शिमला को आदेश दिए हैं कि वह नगर निगम शिमला को उचित पुलिस सहायता मुहैया करवाएं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने अब मामले की सुनवाई 10 मई को निर्धारित की है।
अदालत ने इस मामले में व्यापारमंडल शिमला और तहबाजारी एसोसिएशन को प्रतिवादी बनाया है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि नगर निगम शिमला में दिहाड़ीदारों के 47 पद रिक्त पड़े हैं। अदालत ने इसे चिंताजनक बताने हुए मुख्य सचिव को आदेश दिए कि वह इस मामले को देखें और अपना शपथपत्र अदालत के समक्ष दायर करें। अदालत ने नगर निगम शिमला को यह छूट दी है कि वह अदालती आदेशों की अनुपालना करने के लिए दैनिक भोगी के तौर पर कर्मचारियों को तैनात कर सकता है। इस मामले पर पिछली सुनवाई के दौरान शिमला शहर में अतिक्रमण को रोकने के लिए हाईकोर्ट ने उपयुक्त जगह पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के आदेश जारी किए थे।
अदालत ने निगम से आशा जताई थी कि अतिक्रमणकारियों को संशोधित नियमों के तहत दंडित किया जाएगा। अदालत ने निगम से पूछा था कि शिमला शहर से अतिक्रमण हटाने के लिए अदालत की ओर से पारित आदेशों की अनुपालना में क्या कदम उठाए हैं।
बता दें कि शहर के लोअर बाजार से एक घायल महिला को आईजीएमसी ले जा रही 108 एंबुलेंस बाजार में फंस गई थी। सड़क पर सजीं दुकानों के कारण यह एंबुलेंस करीब 20 मिनट तक फंसी रही। अमर उजाला में प्रकाशित इस खबर पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। इससे पहले वर्ष 2014 में प्रकाशित खबर पर हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे कि पूरे शिमला में किसी भी दुकानदार को गली के किनारों पर सामान को प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं होगी। दुकान के आगे तिरपाल लगाने नहीं दिया जाएगा। नगर निगम अधिनियम की धारा 227 में दिए प्रावधानों के तहत अतिक्रमणकारियों के लाइसेंस रद्द किए जाएं।