इसके तहत बागवानों ने उन्हें वर्ष 2014-15 में सेब बेचे थे, लेकिन उसका भुगतान अभी तक भी किया जा रहा है। प्रार्थी प्रदीप चौहान ने अपनी अग्रिम जमानत याचिका में दलील दी है कि एक अनुबंध के तहत राजेश पांडे और अखिलेश रामसान्ही लैसवाल को प्रार्थी ने अपने कांप्लेक्स में सेब खरीदने की अनुमति दी थी।
वर्ष 2015 में बागवानों को इन लोगों ने भुगतान नहीं किया है, जिसके लिए प्रार्थी को जिम्मेवार नहीं ठहराया जा सकता है। मामले की सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने हाईकोर्ट को बताया गया कि राजेश पांडे और अखिलेश रामसान्ही लैसवाल जांच में शामिल नहीं हो रहे हैं, जिसके चलते कोर्ट ने उक्त आदेश पारित किए। मामले की अगली सुनवाई 25 मई को होगी।