हिमाचल हाईकोर्ट ने अवैध कब्जों को छुड़ाने में हो रही देरी पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और वन विभाग को कड़ी फटकार लगाते हुए तीन जनवरी तक वन भूमि पर पांच बीघा से अधिक कब्जे वाली जमीन छुड़ाने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने प्रदेश के सभी जिला वन अधिकारियों को आदेश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में तीन जनवरी तक पांच बीघा से अधिक वन भूमि कब्जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई करें और उनसे अतिरिक्त भूमि छुड़ाकर अपने कब्जे में लें।
कोर्ट ने कहा कि वन अधिकारियों ने झूठे आंकड़े पेश कर अदालत को गुमराह करने की कोशिश की है। मामले पर अगली सुनवाई तीन जनवरी को होगी। इससे पूर्व पिछली सुनवाई में कोर्ट खेद जता चुका है कि वन विभाग के कर्मचारी कब्जाधारियों से मिलकर अदालत के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं।
कोर्ट ने पूछा आदेशों की अनुपालना क्यों नहीं की
साथ ही चेताया भी था कि यदि अधिकारी आदेशों की अनुपालना करने में नाकाम रहते हैं तो कोर्ट को अपने आदेशों की अनुपालना करवाना बखूबी आता है।सुनवाई में कोर्ट ने वन विभाग के अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को भी कहा कि जब अदालत ने 5 बीघा से अधिक वन भूमि पर अतिक्रमण करने वाले कब्जाधारियों के कब्जे तुरंत हटाने के आदेश दिए थे तो उन्होंने आदेशों की अनुपालना क्यों नहीं की।
कोर्ट ने सभी वन मंडल अधिकारियों को अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई शपथपत्र के माध्यम से कोर्ट को बताने के आदेश दिए। वन विभाग ने कोर्ट को बताया कि इस वर्ष फरवरी माह के बाद उन्होंने 30 अतिक्रमण के मामलों में अंतिम निर्णय दे दिया है। कोर्ट ने वन विभाग की इस सुस्त चाल पर भी फटकार लगाई। कोर्ट ने मुख्य अरण्यपाल को ऐसे मामले जल्द निपटाने के आदेश जारी करने को कहा।
पिछले आदेश में कोर्ट ने यह कहा था
हाईकोर्ट ने पिछले आदेशों में स्पष्ट किया था कि यह ग्राम पंचायत, ग्राम सभा, ग्राम समिति और जिला परिषद के पदाधिकारियों, वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और पुलिस प्रशासन का यह दायित्व है कि कोर्ट द्वारा वन भूमि से अतिक्रमण हटाने बाबत समय-समय पर जारी आदेशों की अक्षरश: अनुपालना
करें। कोर्ट ने प्रधान मुख्य वन अरण्यपाल को पिछले 6 महीनों का रिकॉर्ड न्यायालय के समक्ष पेश करने को कहा था। राज्य सरकार को आदेश दिए थे कि विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष दायर करे, जिसमें उन लोगों का विशेष उल्लेख हो जो सरकारी भूमि का अवैध ढंग से उपयोग कर लाभ ले रहे थे।
ये कार्रवाई करनी थी अफसरों को
रिकवरी की जाए ताकि कब्जाई भूमि पर कोई भी कार्य न कर सकें
सेब व अन्य फलदार पौधों की प्रूनिंग करने की अनुमति कतई न दी जाए
पौधों के नीचे तौलिए बनाने और उनकी स्प्रे करने की इजाजत भी न दी जाए
कब्जाधारियों को किसी भी तरह के बीज उगाने की अनुमति न दी जाए