भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री की दौड़ में जहां कद्दावर अपने समीकरण बैठाने में लगे हैं, वहीं कुछ मंत्रिमंडल में जगह पाने की जद्दोजहद भी तेज हो गई है। कई विधायकों ने मंत्री बनने के लिए दिल्ली रास्ता भी पकड़ लिया है। हालांकि इस बार मंत्रिमंडल का आकार और शक्ल काफी हद तक भाजपा शासित अन्य राज्यों की तरह होगी।
मंत्री पद के लिए भी जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों के साथ प्रशासनिक क्षमता को आधार बनाया जाएगा। दो बड़े जिलों कांगड़ा और मंडी को सर्वाधिक तरजीह मिल सकती है। नए चेहरों को बतौर राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार कामकाज का मौका मिल सकता है। जिला कांगड़ा से 11 विधायक पार्टी के आए हैं, जिसमें से विपिन परमार, किशन कपूर और रमेश धवाला के अलावा सरवीण चौधरी प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।
शांता खेमे से विपिन परमार या पूर्व मंत्री किशन से कोई एक मंत्री बन सकता है। जबकि पूर्व मंत्री सरवीण चौधरी महिला कोटे से आ सकती हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग में रमेश धवाला का नाम आ सकता है। मंडी जिले से 9 सीटें भाजपा के खाते में आई हैं, जहां पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह और सुखराम के पुत्र अनिल शर्मा को स्थान मिल सकता है।
कांगड़ा और मंडी को मिलेगी तरजीह
जयराम अगर मुख्यमंत्री की रेस से बाहर हुए तो वे भी कैबिनेट मंत्री बनेंगे। कुल्लू जिले से महेश्वर सिंह के हारने के बाद मनाली से लगातार जीत रहे विधायक गोविंद ठाकुर की इस बार मजबूत दावेदार हैं। बिलासपुर से मंत्री के प्रबल दावेदार रणधीर शर्मा के हारने के बाद नड्डा के करीबी सुभाष ठाकुर दावेदार हो सकते हैं।
ऊना जिले से प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती के हारने के बाद धूमल के करीबी कुटलैहड़ विधायक विरेंद्र कुंवर का नाम भी मंत्रिमंडल में आ सकता है। शिमला जिले से संघ की मजबूत पृष्ठभूमि वाले तीन बार के विधायक सुरेश भारद्वाज और पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा में से किसी एक जो जगह मिल सकती है। सिरमौर जिले से राजीव बिदंल का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।
इस बार मंत्रिमंडल में सभी कैबिनेट मंत्री के पद नहीं भरे जाएं, दो राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार रह सकते हैं। राज्य मंत्री पहली बार जीतकर आए विधायकों को भी बनाये जाने की संभावना है। राज्य मंत्रियों की सूची नुरपूर से विधायक राकेश पठानिया, चुराह आरक्षित सीट से हंसराज और बंजार से सुरेंद्र शौरी के अलावा महिलाओं में भोरंज से कमलेश कुमारी हो सकती हैं।
ये बन सकते हैं मंत्री
राजीव बिंदल
सुरेश भारद्वाज
महेंद्र सिंह
अनिल शर्मा
विपिन परमार
सरवीण चौधरी
रमेश धवाला
किशन कपूर
विरेंद्र कुंवर
गोविंद ठाकुर
दीपकमल तेजी हुई सरगर्मी, पहुंचे जयराम, चला बैठकों का दौर
भाजपा के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी प्रेम कुमार धूमल की हार के बाद बनी परिस्थितियों के बीच मंगलवार को प्रदेश पार्टी कार्यालय में विधायकों का आना शुरू हो गया। मंगलवार को दिनभर पार्टी कार्यालय में संभावित मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चाओं का दौर जारी रहा। दोपहर बाद सिराज से विधायक व मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे चल रहे जयराम ठाकुर भी पहुंच गए। उनके आते ही नेताओं कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें बधाई देने का दौर शुरू हो गया।
इसके बाद जयराम ने संगठन महामंत्री पवन राणा और पार्टी के महामंत्री चंद्रमोहन ठाकुर के साथ बैठक भी की। हालांकि बैठक को लेकर किसी भी नेता ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। जाहिर है, धूमल की हार के बाद बीजेपी इस वक्त उहापोह की स्थिति में हैं कि किस चेहरे पर सीएम का दांव खेले। हालांकि इसमें सबसे ऊपर जयराम ठाकुर का नाम है।
जयराम पांचवीं बार जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं और उस मंडी जिले से ताल्लुक रखते हैं जहां से भाजपा को इस बार दस में से नौ सीट मिली हैं। इसके अलावा एक निर्दलीय भी भाजपा के साथ ही जुड़ा बताया जा रहा है। ऐसे में क्षेत्रीय व जातीय समीकरण के हिसाब से उनका नाम सबसे ऊपर है।
हालांकि शुरू से ही मुख्यमंत्री की रेस में रहे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के अलावा राजीव बिंदल, नरेंद्र ब्राक्टा और सुरेश भारद्वाज का नाम भी चर्चा में हैं। हालांकि नाम पर चर्चा को लेकर न तो कोई विधायक कुछ भी खुलकर बोलने को तैयार है और न ही कोई पार्टी पदाधिकारी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहा है। अब सोमवार को केंद्रीय नेतृत्व के साथ होने वाली विधायकों की बैठक में मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला होने की संभावना जताई जा रही है।
जयराम बोले, संसदीय बोर्ड तय करेगा नाम
बैठक के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने मुख्यमंत्री की दौड़ में अपना नाम होने से इंकार नहीं किया। हालांकि यह जरूर कहा कि कोई भी निर्णय पार्टी पर्यवेक्षकों के फीडबैक के बाद संसदीय बोर्ड तय करेगा। धूमल के हारने पर कहा कि धूमल के चुनाव हारने से पार्टी को गहरा आघात लगा है।
उन्होंने कहा कि यह नहीं होना चाहिए था इससे सब दुखी हैं। लेकिन वे मानते हैं कि उनकी सेवाएं पार्टी को मिलती रहनी चाहिए।
ठाकुर ने कहा कि पार्टी ने प्रेम कुमार धूमल को पार्टी का नेता घोषित करने का सही फैसला लिया था। यह सोच कर निर्णय लिया था और इसका लाभ भी हुआ है। उनका कहना था कि चुनाव में परिणाम ऐसे आते हैं लेकिन यह परिणाम दुख देने वाला है।