हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगम शिमला के महापौर का कार्यकाल ढाई वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करने पर राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयुक्त, निदेशक शहरी विकास विभाग और नगर निगम को नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने महापौर सुरेंद्र चौहान को याचिकाकर्ता के माध्यम से दस्ती नोटिस देने के लिए कहा है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने इस मामले में सभी प्रतिवादियों से जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
हाईकोर्ट में इसे मामले को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका के माध्यम से अदालत को बताया गया कि शिमला नगर निगम में चुनी हुई महिला पार्षदों की संख्या 21 है। रोटेशन के हिसाब से अगले ढाई वर्ष के लिए यह पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित किया है। प्रदेश सरकार ने इसी बीच एक अध्यादेश जारी कर महापौर के कार्यकाल को ढाई साल बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया है। अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 15 मई 2023 को नगर निगम के चुनाव हुए थे, जिसमें 50 फीसदी महिला चुनाव जीतकर पार्षद बनी हैं। 14 नवंबर को मेयर का ढाई वर्ष का कार्यकाल पूरा हो रहा है, लेकिन सरकार ने ऑर्डिनेंस लाकर कार्यकाल को पांच वर्ष कर दिया है।