फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोर्ट ने पूछा किसने गलत छापा तिरंगा

Fri, 25 Apr 2014 11:55 AM IST
बयूरो/ अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन
हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से जारी पाठ्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज को गलत तरीके से दर्शाने पर हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने प्रदेश के मुख्य सचिव और शिक्षा बोर्ड के सचिव को आदेश दिए हैं कि वह पाठ्यक्रम में त्रुटियों को खत्म करने के लिए दो सप्ताह में निर्णय लें।
विज्ञापन


हाईकोर्ट को बताएं कि इस कार्य के लिए कौन-कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं? प्रार्थी द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि जिस तिरंगे के लिए लाखों वीरों ने अपनी जान कुर्बान की, उस तिरंगे का अपमान बोर्ड के पाठ्यक्रम के माध्यम से किया जा रहा है।

तिरंगे की तीलियां 24 होनी चाहिए, जोकि पाठ्यक्रम में कम हैं। राष्ट्रीय प्रतीक में शेरों के नीचे बैल की जगह हाथी की आकृति डाली गई है। इन त्रुटियों को दूर करने के लिए प्रार्थी ने बार-बार बोर्ड से आग्रह किया, लेकिन उनके द्वारा कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया।
विज्ञापन

विवि अफसरों को वेतन रोकने की चेतावनी

हिमाचल हाईकोर्ट ने अदालत की अवमानना के एक केस में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अफसरों का वेतन रोकने की चेतावनी दी है। अदालती आदेशों का अनुपालन न किए जाने से नाराज हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय को कहा है कि यदि कार्यकारी परिषद (ईसी) दो सप्ताह के भीतर आदेशों को लागू नहीं करती है तो विवि के अफसरों को अपने वेतन से वंचित रहना पड़ेगा।

अदालत ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि कार्यकारी परिषद द्वारा निर्णय लेने के लिए चुनाव आचार संहिता आड़े नहीं आएगी, क्योंकि मामला प्रार्थियों की पेंशन से जुड़ा है।

हिमाचल प्रदेश विवि के रजिस्ट्रार ने अदालत को बताया कि वह बता नहीं सकते कि आदेशों को लागू करने में कितना समय लगेगा, क्योंकि आदेशों को लागू करना कार्यकारी परिषद द्वारा लिए गए निर्णय पर निर्भर करता है।
विज्ञापन

25 मई 2011 को सुनाया था फैसला

याचिकाकर्ता सीता राम, दौलत राम और कृष्ण कुमार द्वारा दायर अनुपालन याचिका के तथ्यों के अनुसार ये सभी विवि के शिमला स्थित एग्रो अनुसंधान केंद्र में कार्यरत थे।

हाईकोर्ट ने निर्णय दिया था कि ये सभी विवि के कर्मचारी बन गए थे, इसलिए वे भी विवि के अन्य कर्मचारियों की तरह ही सभी सेवा लाभ लेने का हक रखते हैं।

हालांकि प्रदेश विवि ने उन्हें अपने कर्मचारी तो मान लिया, परंतु सेवानिवृत्ति लाभ जैसे पेंशन और ग्रेच्यूटी आदि देने के लिए कोई न कोई बहाना बना कर टालमटोल करते रहे। अदालत ने 25 मई 2011 को पारित आदेशों में याचिकाकर्ताओं को सभी सेवा लाभ देने को कहा था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें