हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कम छात्र संख्या वाले सरकारी हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों का दर्जा घटाने या उन्हें नजदीकी स्कूलों में विलय करने के राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराया है। अदालत ने कहा कि पांच या उससे कम छात्रों वाले स्कूलों को चलाना न केवल सरकारी संसाधनों का नुकसान है, बल्कि यह छात्रों के मानसिक विकास एवं प्रतिस्पर्धात्मक माहौल के भी खिलाफ है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी) की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि 14 अक्तूबर 2025 को जारी अधिसूचना में कोई मनमानी या अवैधता नहीं है। अदालत ने शिक्षकों के युक्तिकरण और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को जरूरी बताया। हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता के बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि जिन छात्रों के स्कूलों का विलय किया गया है, उन्हें नए स्कूल तक आने-जाने के लिए मुफ्त एवं पर्याप्त परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाए। जिन मामलों में हाईकोर्ट ने पहले स्थगन आदेश जारी किए थे, उनमें मौजूदा व्यवस्था वर्तमान शैक्षणिक सत्र के अंत तक बनी रहेगी।