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हाईकोर्ट ने सरकार को दी राहत: कहा- कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का दर्जा घटाने का फैसला सही

Thu, 01 Oct 2026 05:37 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के कम दाखिले वाले सरकारी उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों को डाउनग्रेड या अन्य नजदीकी स्कूलों में विलय करने के सरकार के फैसले को पूरी तरह जायज ठहराया है। 
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कम छात्र संख्या वाले सरकारी हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों का दर्जा घटाने या उन्हें नजदीकी स्कूलों में विलय करने के राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराया है। अदालत ने कहा कि पांच या उससे कम छात्रों वाले स्कूलों को चलाना न केवल सरकारी संसाधनों का नुकसान है, बल्कि यह छात्रों के मानसिक विकास एवं प्रतिस्पर्धात्मक माहौल के भी खिलाफ है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी) की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि 14 अक्तूबर 2025 को जारी अधिसूचना में कोई मनमानी या अवैधता नहीं है। अदालत ने शिक्षकों के युक्तिकरण और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को जरूरी बताया। हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता के बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि जिन छात्रों के स्कूलों का विलय किया गया है, उन्हें नए स्कूल तक आने-जाने के लिए मुफ्त एवं पर्याप्त परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाए। जिन मामलों में हाईकोर्ट ने पहले स्थगन आदेश जारी किए थे, उनमें मौजूदा व्यवस्था वर्तमान शैक्षणिक सत्र के अंत तक बनी रहेगी।

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कम छात्रों वाले स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती पर भी टिप्पणी
अदालत ने कहा कि कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए ऐसा वातावरण जरूरी है, जहां वे अपने सहपाठियों के साथ सीखने एवं संवाद करने का अवसर प्राप्त कर सकें। यदि किसी कक्षा में केवल एक या दो विद्यार्थी हों, तो स्वस्थ प्रतिस्पर्धा व आपसी संवाद की गुंजाइश सीमित हो जाती है। कोर्ट ने कहा कि बहुत कम छात्र संख्या वाले स्कूलों में जरूरत से अधिक शिक्षकों की तैनाती से सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है। ऐसे शिक्षकों को उन स्कूलों में तैनात किया जा सकता है, जहां विद्यार्थियों की संख्या अधिक है और शिक्षकों की कमी है।
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ये है पूरा मामला
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 14 अक्तूबर 2025 को अधिसूचना जारी कर 18 सितंबर 2025 तक पांच या उससे कम दाखिले वाले कई हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों का दर्जा घटाने और विद्यार्थियों को नजदीकी स्कूलों में विलय करने का निर्णय लिया था। विभिन्न स्कूलों की एसएमसी ने भौगोलिक दूरी और विद्यार्थियों की यात्रा संबंधी कठिनाइयों का हवाला देते हुए इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
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