किरतपुर-मनाली नेशनल हाईवे के निर्माण कार्य को पूरा करने में आ रही दिक्कतों से निपटने के लिए हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिए कि वह संबंधित डीसी और एसपी को निर्देश जारी करे और नेशनल हाईवे अथॉरिटी को उचित सहायता मुहैया करवाए। मुख्य न्यायाधीश वी रामासुब्रमन्यन और न्यायाधीश अनूप चितकारा की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किए।
इस फोरलेन के निर्माण कार्य में आ रही दिक्कतों को नेशनल हाई वे अथॉरिटी ने शपथपत्र के माध्यम से हाईकोर्ट के समक्ष रखा और संबंधित डीसी और एसपी को जरूरी सहायता प्रदान करने बारे आग्रह किया। अपने पिछले आदेशों में हाईकोर्ट ने कहा था कि इस नेशनल हाईवे के निर्माण कार्य को शीघ्रता से पूरा करने के बजाये नेशनल हाईवे अथॉरिटी जानबूझकर कर जटिल बना रही है और अपनी जिम्मेवारियों से पाला झाड़ने की कोशिश कर रही है।
खंडपीठ ने कड़े शब्दों में कहा कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने का समय आ गया है। हाईकोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी को आदेश दिए थे कि किरतपुर से नेरचौक तक नेशनल हाईवे के निर्माण को पूरा करने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी उत्तरदायी है। उसे आदेश दिए थे कि वह चार सप्ताह के भीतर यह निर्णय लें कि इस निर्माण कार्य को किस तरह से पूरा किया जाए।
अदालत ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया था कि यदि नेशनल हाईवे अथॉरिटी किरतपुर से नेरचौक, नेरचौक से पंडोह बाईपास और पंडोह बाईपास से टकोली तक नेशनल हाईवे के निर्माण को पूरा करने बारे सारिणीबद्ध प्रपोजल अदालत के समक्ष पेश नहीं करती है तो उस स्थिति में अदालत को मजबूरन नेशनल हाईवे अथॉरिटी के चेयरमैन और केंद्रीय सड़क मंत्रालय के सचिव को तलब करना पड़ेगा।