उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने बताया है कि स्वां नदी की निगरानी के लिए डिजिटल व ड्रोन कैमरों से निगरानी करने का फिलहाल कोई विचार नहीं है। ऐसा प्रयोग वर्ष 2018-19 के दौरान उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार सीमावर्ती क्षेत्रों में किया जा चुका है, जो सफल नहीं रहा।
नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री के सवाल का लिखित जवाब देते हुए उद्योग मंत्री ने बताया कि खनन पट्टा धारकों को खनन पट्टा क्षेत्र का सीमांकन कर बुर्जियां स्थापित करना अनिवार्य होता है।
ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाती है। उन्होंने कहा कि पट्टाधारक को पोकलेन व जेसीबी द्वारा खनन पट्टा क्षेत्र में खनन करने की कोई भी अनुमति नहीं दी जाती है।
भारतीय वन सर्वेक्षण देहरादून की भारत वन रिपोर्ट 2019 के अनुसार हिमाचल प्रदेश के वन आवरण में वर्ष 2017 से 2019 के बीच 333.52 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। यह जानकारी दरंग से विधायक जवाहर ठाकुर के सवाल के लिखित जवाब में वन मंत्री ने दी है। वन मंत्री ने बताया कि वन आवरण की वृद्धि में नजदीक रहने वाले स्थानीय निवासियों की भी अहम भूमिका रहती है।
बताया कि वन अधिकार अधिनियम की धारा 3(2) के तहत केंद्र सरकार द्वारा सरकार द्वारा प्रायोजित 13 मूलभूत सुविधाओं के लिए संबंधित वन मंडल अधिकारी के स्तर पर वन भूमि के प्रत्यावर्तन का प्रावधान किया है। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क व पीने के पानी की सुविधा शामिल है। हालांकि, इस प्रावधान का स्थानीय लोगों के वन आवरण की वृद्धि में सहयोग से सीधा संबंध नहीं है।
हिमाचल में बीते तीन साल के दौरान राज्य बिजली बोर्ड के 34 कर्मियों की मौत ड्यूटी के दौरान हुई है। इनमें 5 आउटसोर्स कर्मी भी थे। 11 कर्मियों के परिवारों को करुणामूलक आधार पर नौकरी दे दी गई है। 14 मामले प्रगति पर हैं जबकि 9 कर्मियों ने नौकरी के लिए आवेदन ही नहीं किया। 34 में से 23 कर्मियों के परिवार पेंशन के दायरे में आते हैं जबकि 11 अन्य को न्यू पेंशन स्कीम में डाला गया है।
ठियोग से विधायक राकेश सिंघा के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि बिजली कर्मियों को चार लाख मुआवजा दिया जाता है जबकि करंट लगने से अपाहिज हुए व्यक्ति को दो लाख दिया जाता है। मजदूर रोशन लाल का मामला कोर्ट में चल रहा है लेकिन सरकार उसके परिवार को दो लाख देगी।
राष्ट्रीय राजमार्ग परवाणू-सोलन फोरलेन का काम 84.60 फीसदी पूरा कर लिया है। कुछ क्षेत्रों में भूमि अवाप्ति में देरी, पेड़ों के कटान पर एनजीटी की रोक और डगशाई में सेना भूमि के हस्तांतरण में विलंब के चलते निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है। विधायक जगत सिंह के सवाल का लिखित जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सोलन से ढली तक का काम दो चरणों में होना है।
सोलन से कैथलीघाट तक 12.50 फीसदी काम हो चुका है। इस कार्य को मई 2021 तक पूरा कर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि कैथलीघाट से ढली तक अभी एक प्रतिशत काम हुआ है। केंद्र सरकार ने इस बाईपास सेक्शन को दो लेन की जगह फोरलेन मानक के अनुसार बनाने को कहा है। केंद्रीय मंत्री ने एनएचएआई को तीन माह के भीतर बिडिंग प्रोसेस पूरी करने को कहा है। राज्य सरकार को निर्माण गिराने, मुआवजा राशि देने और पेड़ों की कटाई करने को कहा है।