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हिमाचल की मॉडल जेल के हाल, 8 दिन से बिना पानी-बिजली के कैदी

Mon, 16 Jan 2017 04:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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बर्फबारी के बाद पिछले आठ दिन से मॉडल सेंट्रल जेल कंडा के करीब साढ़े पांच सौ कैदी बिना बिजली-पानी जीवन गुजार रहे हैं। सरकार और प्रशासन भी आम लोगों की चिंता कर रहे थे, लेकिन किसी ने कैदियों के हालात पर नजर नहीं डाली।
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इन्हें टैंकरों से पानी मुहैया कराया जा रहा था। जेल फंड की कमी से जरूरत का भी पानी नहीं मिल रहा था। जेल की स्थिति ने सरकार के मॉडल जेल के दावे की पोल खोल दी है। सूत्रों की मानें तो तीन से पांच लीटर पानी प्रति कैदी दिया जा रहा था।

यह मात्रा आम दिनों के तीस लीटर पानी प्रति दिन प्रति कैदी के अनुपात में नाममात्र थी। तीन से पांच लीटर पानी में कैदी को नहाने, पीने और शौचालय के लिए गुजारा करना था। ऐसे में ज्यादातर कैदियों ने आठ दिन बिना नहाए ही गुजारे।
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जेल सुपरिंटेंडेंट शेर चंद शर्मा ने बताया कि बर्फबारी के बाद से बिजली नहीं थी। इस वजह से पानी की सप्लाई भी नहीं हुई। उपलब्ध फंड से जितना हो सका, बिजली के लिए जेनरेटर का डीजल मंगाया गया। साथ ही पानी भी टैंकरों से मंगवाया गया।

सामान्य दिनों से पानी की सप्लाई कम ही हुई। अब जेल मुख्यालय को आने वाले समय में जरूरत पड़ने पर डीजल और पानी के लिए फंड उपलब्ध कराने को लिखा है।
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सिर्फ रात में जलती थी ऑफिस की लाइट

जेल सूत्रों की मानें तो आठ दिन में जेल का संपर्क पूरी तरह मुख्यालय से कटा था। कहने को भले ही यह मॉडल जेल है और यहां एक जेनरेटर भी लगा है, लेकिन इसमें डीजल की खपत एक घंटे में करीब बीस से 25 लीटर की है। ऐसे में जेल प्रशासन भी सिर्फ रात में कुछ घंटों के लिए ही जेनरेटर चला रहा था। कंडा जेल की स्थिति ने प्रदेश की मॉडल जेलों के सरकारी दावे की पोल खोलकर रख दी है।

क्षमता से डेढ़ गुना ज्यादा हैं कैदी
कंडा जेल की क्षमता आधिकारिक रूप से तो महज 398 कैदियों की है, लेकिन वर्तमान में जेल में करीब पौने छह सौ कैदी हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो जेल में बिजली और पानी की पर्याप्त व्यवस्था न होने से कभी भी स्थिति बिगड़ सकती है। जेल विभाग में पहले से कर्मचारियों की कमी है, ऐसे में अगर अंधेरे का फायदा उठाकर कैदी भागने का प्रयास करें या फिर पानी को लेकर हंगामा करने लगें तो जेल प्रशासन के लिए स्थिति संभालना आसान नहीं होगा।
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