सात माह पहले पड़ चुकी थीं दरारें
स्थानीय लोगों ने बताया कि सात महीने पहले ही इस सड़क पर दरारें आ चुकी थीं। इस बारे में पार्षद को बताया था। पार्षद ने इसका प्रस्ताव बनाकर नगर निगम को भेजा लेकिन निगम ने इसके टेंडर में ही कई महीने लगा दिए। निगम ने जून में इसका टेंडर लगाया लेकिन फिर काम शुरू नहीं किया। अब जब सड़क धंसी तो ठेकेदार भी मौके पर पहुंच गया। लोगों ने कहा कि यदि समय से डंगा लगाते तो सड़क और मकानों को खतरा न होता। सड़क धंसने से वीके मेहता के भवन को भी खतरा पैदा हो गया है। कई महीने से इस सड़क पर दरारें थीं। पार्षद रचना शर्मा ने कहा कि उन्होंने कई महीने पहले इसका प्रस्ताव निगम को भेज दिया था। जून में इसका काम ठेकेदार को अवार्ड हुआ है लेकिन बारिश के चलते अभी काम शुरू नहीं कर पाए। कहा कि मौके पर तिरपाल लगा दिए गए हैं ताकि और नुकसान न हो।
शहर में अब तक 12 भवनों को खतरा
उपमहापौर उमा कौशल ने कसुम्पटी में हुए भूस्खलन की अधिकारियों और स्थानीय पार्षद से रिपोर्ट ली। निर्देश दिए कि मौके पर राहत कार्य जल्द शुरू किए जाएं। यदि तिरपाल की जरूरत है तो इसे मुहैया करवाया जाए।
शहर में भारी बारिश के चलते अब तक 12 भवनों पर खतरा मंडरा चुका है। भूस्खलन से इनकी नींव खोखली हो चुकी है। पंथाघाटी, मैहली और कसुम्पटी क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। इन इलाकों में ही आधा दर्जन भवनों के पास भूस्खलन हो चुका है।