हाईकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा सरकारी और वन भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों को राहत देने के लिए बनाए गए प्रारूप नियमों के प्रकाशन की इजाजत मांगने के लिए दायर आवेदन पर सुनवाई 21 मार्च तक टल गई है।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने सरकार के इस आवेदन पर संबंधित पक्षकारों को एक सप्ताह के भीतर आपत्तियां दर्ज करने के आदेश जारी किए।
सरकार ने इस आवेदन के माध्यम से कोर्ट को बताया कि वह विधानसभा के संकल्प स्वरूप सरकारी और वन भूमि पर 5 बीघा भूमि तक के अतिक्रमण को मानवीय आधार पर मालिकाना हक में तब्दील करना चाहती है।
सरकार ने इस आवेदन के साथ भू राजस्व अधिनियम के तहत बनाए गए उन प्रारूप नियमों की प्रति भी पेश की जिसके तहत अतिक्रमणकारियों को राहत देने के नियम बनाए गए हैं। सरकार ने छोटे, गरीब और भूमिहीन किसानों द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमण को मालिकाना हक में तबदील करने के लिए इन प्रारूप नियमों को राजपत्र में प्रकाशित करने की इजाजत मांगी है।