हिमाचल में पीजी करने वाले डॉक्टरों को अब पहली बार 10 लाख रुपये की बैंक गारंटी देनी होगी। अगर पढ़ाई के बाद डॉक्टर सरकारी नौकरी पर नहीं लौटे तो उन्हें यह बैंक गारंटी सरकारी कोष में जमा करनी होगी।
ये व्यवस्था सुपर स्पेशिलिटी की पढ़ाई के लिए जाने वाले डॉक्टरों पर भी लागू होगी। अभी तक प्रत्येक डॉक्टर से 25 लाख रुपये के बैंक बांड भराए जाते रहे हैं जिन्हें सरकार को लौटाना पड़ता था।
राज्य के सरकारी अस्पतालों से डॉक्टरों के पलायन को देखते हुए हिमाचल मंत्रिमंडल ने यह कठोर फैसला लिया है। राज्य विधानसभा परिसर में मंगलवार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में निर्णय लिया गया है कि राज्य के तमाम टोल बैरियरों को दस फीसदी बढ़ोतरी के साथ नीलाम किया जाएगा।