मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को निजी तौर पर डिफेंडेंट (वह जिसके ऊपर मुकदमा चलाया जाए) बनाए जाने संबंधी एचपीसीए की याचिका पर सोमवार को हाईकोर्ट में करीब तीन घंटे बहस हुई। एक्टिंग चीफ जस्टिस मंसूर अहमद मीर और जस्टिस तरलोक चौहान की खंडपीठ ने बुधवार तक इस केस की सुनवाई टाल दी।
सोमवार को एचपीसीए की ओर से सीनियर एडवोकेट पीएस पटवालिया और राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल
श्रवण डोगरा ने जिरह की। एचपीसीए ने अपनी याचिका के जरिये मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, डीजीपी संजय कुमार, डीसी कांगड़ा सी. पालरसु और एसपी कांगड़ा बलबीर ठाकुर को निजी तौर पर डिफेंडेंट बनाने का आग्रह किया है।
इसके बाद दिए गए आवेदन के जरिये मूल याचिका को संशोधित करने और पंजीयक सहकारी सभाएं को भी डिफेंडेंट बनाने का आग्रह भी किया गया है। सोमवार को कोर्ट में बहस की दौरान एचपीसीए की ओर से कहा गया कि 26 अक्टूबर की आधी रात को जिस तरह से धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम का ताला तोड़कर कब्जे का प्रयास हुआ, ये राजनीतिक प्रताड़ना का कृत्य है और ये मुख्यमंत्री के कहने पर किया गया।
चूंकि, सरकार ने कांग्रेस चार्जशीट के आधार पर ये फैसला लिया था, इसलिए ये राजनीतिक दुर्भावना का उदाहरण भी है। दूसरी ओर, एडवोकेट जनरल ने एचपीसीए की इस याचिका को इस आधार पर खारिज करने की मांग की कि ये फैसला कैबिनेट का था।
सरकार ने पंजीयक सहकारी सभाएं पर इस केस में अगला कदम उठाने पर लगाई गई रोक को भी हटाने का आग्रह किया है। हालांकि, सरकार की ओर से बहस अभी जारी है। बुधवार को ये नए सिरे से शुरू होगी।