शिमला। स्क्रब टायफस के बढ़ते मामलों के चलते स्वास्थ्य महकमे ने लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी है। आईजीएमसी में हर रोज स्क्रब टायफस के मामले आ रहे हैं। वीरवार को भी 13 नए मामले इस बीमारी के आए हैं।
अब तक इस बीमारी से सबसे अधिक मौतें शिमला जिले से हुई हैं। शिमला जिले के पांच मरीज स्क्रब टायफस से दम चुके हैं। इसके अतिरिक्त सात मौतें अलग-अलग जिलों के रहने वाले मरीजों की हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अभी एक माह तक इस बीमारी के मरीज आते रहेंगे। वीरवार को भी आईजीएमसी में तेरह नए मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जनकराज ने इसकी पुष्टि की है।
प्रदेशभर में स्क्रब टायफस का प्रकोप बना हुआ है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार पॉजिटिव केस और स्क्रब टायफस से मरने वालों की संख्या में कमी आई है। प्रदेशभर में बारह मरीजों की मौत स्क्रब टायफस से हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2018 में दो अक्तूबर तक 1165 मरीजों की टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी और 19 मरीजों की मौत हुई थी। वर्ष 2019 में दो अक्तूबर तक 1148 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि घास कटाई के सीजन के दौरान ऊपरी शिमला से अधिक मामले आते हैं। यह बीमारी घास में पाए जाने वाले एक खास तरह के पिस्सू के काटने से होती है। यही कारण है कि जब बरसात में घास कटाई का सीजन शुरू होता है तो इस बीमारी के मरीज भी बढ़ जाते हैं। चिकित्सकों ने लोगों को हिदायत दी है कि घास की कटाई के दौरान पूरे बाजू के कपड़े पहनें ताकि उन्हें यह पिस्सू न काटे। इसके अलावा घरों के आसपास भी सफाई रखें तथा घास न उगने दें।