अदालत ने स्वास्थ्य सचिव को आदेश दिए हैं कि वे शपथपत्र के माध्यम से अदालत को बताएं कि चयनित चिकित्सकों को नियुक्ति क्यों नहीं दी गई है। अदालत ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि शपथपत्र दायर न करने की स्थिति में प्रतिकूल आदेश पारित किए जा सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चयनित चिकित्सकों को नियुक्ति नहीं देने पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने स्वास्थ्य सचिव को आदेश दिए हैं कि वे शपथपत्र के माध्यम से अदालत को बताएं कि चयनित चिकित्सकों को नियुक्ति क्यों नहीं दी गई है। अदालत ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि शपथपत्र दायर न करने की स्थिति में प्रतिकूल आदेश पारित किए जा सकते हैं। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने मामले की आगामी सुनवाई 31 मई को निर्धारित की है।
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17 नवंबर 2022 को अदालत ने वॉक इन इंटरव्यू में चयनित चिकित्सकों को नियुक्ति देने के पक्ष में निर्णय सुनाया था। याचिकाकर्ता ऐश्वर्या ठाकुर और अन्य ने इस निर्णय को लागू करने के लिए याचिका दायर की है। आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार ने छह महीनों की भीतर भी अदालत के निर्णय को लागू नहीं किया है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें दो हफ्ते के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करने के आदेश दिए थे। अदालत ने 30 दिसंबर 2022 को अनुपालना रिपोर्ट तलब की थी। उस दिन सरकारी वकील ने आदेशों की अनुपालना के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी।
अदालत ने 7 जनवरी 2023 तक अनुपालन रिपोर्ट मांगी थी। 6 अप्रैल 2023 को सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि हाईकोर्ट के निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा रही है। मामले पर सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि आदेशों पर अमल न करने वाली सरकारी वकील की दलील गुमराह करने वाली है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक हाईकोर्ट के आदेश सुप्रीम कोर्ट से स्थगित अथवा निरस्त नहीं हो जाते, तब तक हाईकोर्ट के आदेशों की अनुपालना करना सरकार का कर्तव्य है।