हिमाचल में कानून व्यवस्था संभालने के लिए दिन-रात काम करने वाले पुलिस कर्मचारियों की गिरती सेहत को बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने बड़ी कवायद की है। पुलिस मुख्यालय ने जवानों को मिलने वाली डाइट मनी बढ़ाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा है। इसमें डाइट मनी को सामान्य तौर के बजाय जवानों की खाने की कैलोरीफिक वैल्यू के आधार पर बढ़ाने की सिफारिश की है। फिलहाल, कोरोना के चलते प्रस्ताव वित्त विभाग के पास लंबित है।
डीजीपी बनने के बाद संजय कुंडू की नजर सबसे पहले जवानों की कमजोर कद काठी पर पड़ी थी। जानकारी करने पर पता चला था कि चूंकि कर्मचारियों को डाइट मनी बहुत कम मिलती है, ऐसे में इसका सीधा असर उनकी सेहत पर पड़ता है। इसी वजह से डाइट मनी बढ़ाने का प्रस्ताव बनाने की कवायद शुरू की गई। कुंडू ने बताया कि सिर्फ डाइट मनी बढ़ाने से जवानों की सेहत में बदलाव होना संभव नहीं है।
फिट बॉडी के लिए खाने में पौष्टिकता होना बेहद जरूरी है। कहा गया है कि केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की तर्ज पर हिमाचल के जवानों की डाइट में कैलोरीफिक वैल्यू निर्धारित करने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जाए। तब तक डाइट मनी को इस तरह रखा जाए कि जवान हर डाइट में कम से कम तेइस सौ से पच्चीस सौ कैलोरी वाली खुराक ले सकें। इसे नकद या जवानों को पुलिस की तरफ से ही खाद्य सामग्री के तौर पर उपलब्ध कराया जा सकता है।
अभी सिर्फ 210 रुपये प्रति महीना है डाइट मनी
वर्तमान में पुलिस कर्मियों को 7 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से महज 210 रुपये डाइट मनी मिलती है। इस राशि में एक वक्त की चाय भी नहीं मिल सकती। इसी वजह से पुलिस मुख्यालय ने इसे बढ़ाकर कम से कम एक हजार रुपये प्रतिमाह करने का प्रस्ताव भेजा है। प्रदेश में करीब 18 हजार जवान हैं। ऐसे में इतने जवानों की डायट मनी बढ़ाने के लिए वित्त विभाग को खासी मशक्कत करनी पड़ेगी।
कैलोरिफिक वैल्यू बढ़ी तो काम होगा बेहतर
डीजीपी कहते हैं कि अगर डाइट में कैलोरीफिक वैल्यू बढ़ेगी तो इससे जवानों की सेहत पर काफी फर्क पड़ेगा। वह ज्यादा तंदुरुस्त दिखेंगे और उनकी परफॉर्मेंस बेहतर होगी। कोरोना जैसे समय में जब जवानों को लगातार लंबी ड्यूटी करनी पड़ रही है, कैलोरीफिक वैल्यू वाली गुणात्मक डाइट लेने से उनके अंदर न सिर्फ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी बल्कि वह लंबी ड्यूटी भी कम थकान के साथ कर सकेंगे।