बताया जा रहा है कि सरकारी स्टोर से इन दवाओं को सुबह ही इंडोर पेशेंट्स के लिए दिया गया था। सभी रोगियों की हालत ठीक बताई जा रही है। जिला प्रशासन ने मामले में तहसीलदार से 24 घंटों के भीतर रिपोर्ट तलब की है।
विनय कुमार (14) गांव तालाब, हिमांशु (04) गांव सरौरी, आदित्य 8 माह, लक्ष्मी देवी (4) गांव कलथर, कृतिका 8 माह गांव टिक्कर, संदीप (14) कमलाह, आशा (5) गांव दलोली, शिवन्या (1) गांव नाल्ता, संचित ठाकुर (7) गांव लालाना, वंश (2) हमीरपुर, निशांत
(12) गांव झंजैल, आरव (5) नेरी लांगना, लवली (3) गांव जमसाई, मोनिका (9) गांव गरौडू, स्वर्णिम (2) चन्जयार और महिलाओं में ज्ञानो देवी (70), इंद्री देवी (64) संदोआ और कारजु गांव कुठेड़ आदि शामिल हैं।
सुबह तबीयत बिगड़ने वाले रोगियों को Ceftrixone 1 gm, ceftrixone salbactum 1.5 gm, amoxyclav 1.2 gm के इंजेक्शन दिए थे। तबीयत कैसे बिगड़ी, स्वास्थ्य विभाग इस पहलू पर जांच कर रहा है।
कहीं सिरिंज की गुणवत्ता या एंटीबायोटिक या दवाएं अधोमानक सप्लाई तो नहीं हुई थी। विभाग इस पहलू पर भी जांच कर रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी मंडी डा. देसराज का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
ड्रग्स इंस्पेक्टर को मंडी से सरकाघाट के लिए इंजेक्शन, सिरिंज आदि की गुणवत्ता जांचने और विभाग द्वारा आपूर्ति की गई दवाओं के बारे मेें पूरी रिपोर्ट देने को कहा गया है।