बीमारी को गंभीरता से न लेने के हो सकते है गंभीर परिणाम
आईजीएमसी के मनोरोग विभाग में रोजाना आ रहे औसतन 150 से अधिक मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिंदगी की भागदौड़ और आगे बढ़ने के लिए बढ़ रही प्रतिस्पर्धा, अभिभावकों के सपनों को सकार करने सहित अच्छा रोजगार पाने जैसी इच्छाओं के चलते मनोरोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। मनोरोगियों के बढ़ रहे आंकड़े चिंताजनक हैं। आज हर सौ व्यक्तियों में एक व्यक्ति मनोरोग से ग्रस्त है। राजधानी शिमला के सबसे स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी के मनोरोग विभाग में रोजाना औसतन 150 मनोरोगी उपचार के लिए आ रहे है, इनमें 30 से 35 नए रोगी हैं। इनमें अधिकतर मामले मूड डिसआर्डर, डिप्रेशन, अवसाद के अलावा किसी भी तरह के नशे के आदी बन चुके लोग भी मनोरोगों की चपेट में आ रहे हैं।
आईजीएमसी के मनोरोग विभाग के अध्यक्ष डाॅ. दिनेश दत्त शर्मा ने माना कि मनोरोगियों की संख्या बढ़ रही है, मानसिक रोग को लोग अब रोग समझ कर उपचार के लिए भी खुलकर आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि डिप्रेशन, अवसाद और अन्य किसी तरह के मानसिक विकार आने की स्थिति में इसका समय से उपचार करवाना जरूरी होता है। इसे भी अन्य रोगों की तरह गंभीरता से लेकर इसका उपचार करवाना बेहद जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी में नशे के आदी होने के बाद मानसिक रोगी बने युवा भी आने लगे हैं। फिर नशा चिट्टे का हो, शराब या कोई और यह भी मानसिक रोगों का कारण बनता है। दस अक्तूबर को मनाए जा रहे विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में वीरवार को विभाग में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें नर्सिंग प्रशिक्षुओं ने विभाग की ओपीडी में आए मरीजों और उनके तीमारदारों को मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूक किया। इस दौरान विभाग के चिकित्सक डाॅ. देवेश, डाॅ. सुमनलता, डाॅ. रवि, डाॅ. सुमनलता ने तीमारदारों और मरीजों को जागरूक किया और डिप्रेशन से बाहर निकालने को लेकर काउंसलिंग की। नर्सिंग स्टाफ ने एक नाटक प्रस्तुत कर जागरूक किया। इसमें बताया गया कि यदि कोई युवा नशे का आदी होता है, तो उसका मनोबल बढ़ाने की आवश्यकता होती है, उसकी मदद करनी चाहिए। चिकित्सकों ने बताया कि नशे की लत भी एक मानसिक रोग है, जिसका सही समय पर उपचार और परामर्श लेकर समाधान करना आवश्यक होता है। नशे के आदी हो चुके युवाओं को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करना, उनके प्रति सहानुभूति रखना, और उनको सहयोग की भावना से कार्य कर मनोबल बढ़ाना जरूरी होता है।