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Shimla News: आईजीएमसी में नहीं हो रही शुगर जांच, एचबीए1सी टेस्ट भी नहीं

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निजी प्रयोगशाला में टेस्ट करवाने को मजबूर हो रहे मरीज
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थायरॉइड और विटामिन टेस्ट सात माह से बंद, मरीज परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में मरीजों की शुगर की जांच नहीं हो रही हैं। आईजीएमसी की सरकारी प्रयोगशाला में टेस्ट कई दिनों से बंद पड़ रहा है। ऐसे में शुगर टेस्ट के लिए अब मरीजों को धक्के खाने पड़ रहे हैं। एचबीए1सी यानी रेंडम शुगर जांच के लिए मरीजों को निजी प्रयोगशालाओं में भटकने पर मजबूर है। इससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इससे पहले अस्पताल में पिछले सात माह से थायरॉइड और विटामिन की जांच नहीं हो रही है। इस टेस्ट को अस्पताल प्रबंधन अभी तक शुरू नहीं करवा सका है। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि क्रस्ना लैब में 24 घंटे रक्त जांच हो रही है। इससे प्रश्न यह उठता है कि अगर क्रस्ना लैब में सभी टेस्ट हो रहे हैं, तो क्या अस्पताल की सरकारी लैब में टेस्ट नहीं होंगे। वहीं, सरकारी प्रयोगशाला में टेस्ट न होने से मरीजों को क्रस्ना लैब में जांच करवाने के लिए भेजा जा रहा है। सोमवार, मंगलवार और बुधवार को क्रस्ना लैब के पंजीकरण काउंटर पर काफी भीड़ रहती है। यहां पर भीड़ होने के कारण मरीजों की बारी देरी से आती है। कई बार लाइन में लगे मरीजों को एक घंटा तक परेशान होना पड़ता है। वहीं, कई बार भीड़ अधिक होने के बाद मरीज निजी प्रयोगशाला का रुख कर रहे हैं। इससे मरीजों के जेब का बोझ भी बढ़ रहा है।
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इनसेट
जांच में देरी से उपचार भी लेट
अस्पताल में शुगर जैसा टेस्ट न होने से मरीजों को काफी दिक्कतें आ रही हैं। अत्याधुनिक मशीनें अस्पताल में लगाई जा रही हैं लेकिन मरीजों का रोजमर्रा के टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। इससे प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। टेस्ट न होने से मरीजों के उपचार में भी देरी हो रही है। रेंडम शुगर जांच हर तीसरे मरीज को लिखा जाता है, ताकि बीमारियों का पता लगाया जा सके।

कोट
अस्पताल में क्रस्ना लैब 24 घंटे मरीजों के टेस्ट कर रही हैं। मरीजों को किसी भी प्रकार की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ रहा है।
-डॉ. राहुल राव, चिकित्सा अधीक्षक, आईजीएमसी
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