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स्वास्थ्य: उत्तराखंड में हिमाचल की कशमल से बनेगी औषधि, इन रोगों के उपचार में होता है उपयोग

Tue, 20 Jan 2026 11:48 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा।

सार

 चंबा जिले में प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली कशमल अब उत्तराखंड स्थित औषधि कारखानों में दवा निर्माण के काम आ रही है।
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कशमल की जड़। - फोटो : संवाद
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हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली कशमल अब उत्तराखंड स्थित औषधि कारखानों में दवा निर्माण के काम आ रही है। कशमल के पत्तों से लेकर जड़ों तक का उपयोग मधुमेह (शुगर), पीलिया, बवासीर और आंखों के रोगों के उपचार में प्रयोग होने वाली औषधियों में किया जाता है। उत्तराखंड के आम डंडा क्षेत्र में स्थित औषधि कारखानों में कशमल की मांग लगातार बढ़ी है। बीते एक सप्ताह में 68 माल वाहक वाहनों के माध्यम से 5,850 क्विंटल कशमल की खेप उत्तराखंड रवाना की गई है। चंबा जिले के चुराह और चंबा विधानसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले परिक्षेत्रों में वन भूमि के साथ साथ निजी भूमि पर भी कशमल का प्राकृतिक उत्पादन हो रहा है।

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विशेषकर चुराह विधानसभा क्षेत्र के कई इलाकों में कशमल ग्रामीणों के लिए आय का महत्वपूर्ण साधन बनकर उभरी है। सूत्रों के अनुसार बैरियर पर कृषि एवं उपज मंडी की ओर से ग्रामीणों को मिलने वाले दामों की जानकारी भी ली गई। इसमें सामने आया कि बाहरी ठेकेदार स्थानीय लोगों से कशमल 30 से 40 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीद रहे हैं, जबकि आगे औषधि कंपनियों को यही कशमल 60 से 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक बेची जा रही है। कम दाम मिलने और प्राकृतिक दोहन की आशंका के चलते अब कुछ ग्रामीण कशमल निकालने से परहेज करने लगे हैं। उत्तराखंड के औषधि कारखानों में कशमल का उपयोग दवा निर्माण में किया जाता है। चंबा से मांग की गई थी। बैरियर रिकॉर्ड के मुताबिक एक हफ्ते में 5,850 क्विंटल खेप भेजी गई है। अभी और भी मांग आ रही है। भानू प्रताप सिंह, सचिव, कृषि एवं उपज मंडी चंबा
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