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सरकार ने माना, पीलिया से हुई दस लोगों की मौत

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राजधानी शिमला में पीलिया से हुई मौतों के मामले में हाईकोर्ट के दखल के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। बुधवार को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने शिमला में प्रेस कांफ्रेंस कर माना कि पीलिया से दस लोगों की मौत हुई। 5 मरीजों को हेपेटाइटस-ई था। तीन की मौत शिमला आईजीएमसी में हुई, जबकि दो की मौत पीजीआई चंडीगढ़ में हुई। बताया कि 5 लोगों की मौत पीलिया सहित अन्य बीमारियों से हुई है।
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इन लोगों को अस्थमा, दिल और लीवर के रोग भी थे। कौल सिंह ने कहा इस मामले में ब्लेम गेम बंद होनी चाहिए। सभी विभागों को एकजुट होकर काम करना चाहिए। पीलिया की चपेट में आकर मरने वालों लोगों की संख्या को लेकर बीते कई दिनों से प्रदेश में विवाद छिड़ा हुआ है। हिमाचल सरकार मंगलवार शाम तक पीलिया से सिर्फ तीन लोगों की मौत होने की बात कहती रही है।

भाजपा सहित कई अन्य राजनीतिक दलों ने सरकार पर अपनी कमियों को छिपाने के लिए झूठा प्रचार करने के आरोप लगाए। वकीलों ने शिमला की सड़कों पर उतर कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदेश हाईकोर्ट ने इन सभी मामलों पर संज्ञान लेते हुए
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जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए पीजीआई निदेशक और सभी जिलों के सीएमओ को आदेश जारी कर पीलिया से मरने वालों का आंकड़ा कोर्ट में देने के आदेश दिए।

कोर्ट का दबाव पड़ते ही हिमाचल सरकार ने बुधवार को पीलिया से मरने वालों के आंकडे़ को तीन से बढ़ाकर दस कर दिया है। सरकार की इस कार्यप्रणाली ने अफसरों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

मंत्री बोले, आईजीएमसी में बनेगी पेयजल जांच लैब

स्वास्थ्य मंत्री ने शहरवासियों से पीने का पानी कम से कम दस मिनट तक उबाल कर पीने की अपील की है। उन्होंने कहा कि राजधानी शिमला सहित सोलन, नाहन में पीलिया फैलना दुर्भाग्यपूर्ण है। अश्वनी खड्ड का पानी बहुत ज्यादा गंदा था। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट ठीक से काम नहीं कर रहा था।

शिमला, सोलन, नाहन में करीब 1500 लोगों का पीलिया टेस्ट पॉजीटिव रहा। करीब 600 मरीजों में हेपेटाइटस-ई के लक्षण पाए गए। मंडी में पीलिया नहीं फैला। वहां के जो लोग पीलिया की चपेट में आए, वह शिमला में रहकर गए थे। मंडी के पानी के सैंपल सही पाए गए।

कौल सिंह ठाकुर ने बताया कि छह माह के भीतर आईजीएमसी में पानी की जांच करने के लिए लैब स्थापित की जाएगी। संबंधित अधिकारियों को इसके लिए निर्देश जारी कर दिए हैं।

शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में पानी की क्लोरीनेशन करने को कहा है। क्लोरीन डाल कर पानी को कम से कम दो घंटे तक टैंक में स्टोर करने को कहा है। पूरे प्रदेश में पानी के स्टोरेज टैंकों को साल में एक बार साफ करने को भी कहा गया है।
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चंबा, नाहन मेडिकल कॉलेज में कक्षाएं अगस्त से

हिमाचल प्रदेश में स्थापित किए जा रहे तीन मेडिकल कॉलेजों में से दो में ही अगस्त महीने से कक्षाएं शुरू हो सकेंगी। हमीरपुर मेडिकल कॉलेज की साइट में अड़ंगा फंस गया है। फारेस्ट क्लीयरेंस अथारिटी को मामला भेजा गया है। राज्य सरकार ने चंबा और नाहन में 100-100 विद्यार्थियों का पहला बैच अगस्त महीने से बिठाने का फैसला लिया है।

इन दोनों कॉलेजों की साइट का एमसीआई की टीम निरीक्षण भी कर चुकी है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने बताया है कि हमीरपुर में नए स्थान की तलाश भी जारी है। हमीरपुर में भी जल्द ही कक्षाएं शुरू की जाएंगी। तीन नए मेडिकल कॉलेजों के निर्र्माण के लिए बीते दिनों ही केंद्र सरकार ने दस करोड़ रुपये जारी किए हैं।

नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से हिमाचल प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश के अधिक से अधिक निवासियों के लिए चिकित्सा शिक्षा सुलभ हो सकेगी। कॉलेजों के लिए 12 करोड़ की राशि यूपीए सरकार के कार्यकाल में ही जारी की गई थी।

राज्य सरकार ने राज्य में खुल रहे तीन नए मेडिकल कालेजों को पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, पहले मुख्यमंत्री डॉ. वाइएस परमार और पहले उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का नाम देने का फैसला लिया है।

परमार, नेहरू और राधाकृष्णन के नाम से होंगे कॉलेज- नाहन मेडिकल कॉलेज डॉ. वाईएस परमार, चंबा मेडिकल कालेज जवाहर लाल नेहरू और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज डा. सर्व पल्ली राधाकृष्णन के नाम से होगा। सरकार ने नए खोले जाने वाले मेडिकल कॉलेजों में नियुक्त किए जाने वाले शिक्षकों की सेवानिवृत्त आयु 62 से 65 साल करने का फैसला लिया है।
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