हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों की 12 जातियों और इनसे जुड़ी कई उपजातियों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिया गया है। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र के हाटी समुदाय को एसटी में शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने यह फैसला किया।
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि कई राज्यों की जातियां अरसे से एसटी में शामिल करने की मांग कर रही थीं। यूपी की गोंड जाति और इससे जुड़ी पांच उपजातियों धुरिया, नायक, ओझा, पठारी और राजगोंड भी अनुसूचित जाति (एससी) से एसटी में शामिल की गई हैं। अनुराग ठाकुर ने कहा कि भाजपा इस संदर्भ में संसद में बजट सत्र के दूसरे चरण में संविधान (अजा-जजा) आदेश (दूसरा संशोधन) बिल लाई थी। इसे लोकसभा की मंजूरी मिल चुकी है, पर राज्यसभा में पारित नहीं हो सका। इसके बाद केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस आशय का फैसला किया गया।
केंद्रीय कैबिनेट के इस ऐतिहासिक निर्णय से सिरमौर जिले की 1.60 लाख से अधिक की आबादी लाभान्वित होगी। सिरमौर के चार विधानसभा क्षेत्र रेणुका, शिलाई, पच्छाद और पांवटा के बड़े भू-भाग पर रहने वाले लोगों को यह दर्जा मिलेगा। रेणुका और शिलाई इसमें पूरी तरह से कवर होंगे। पच्छाद और पांवटा की आबादी के एक बड़े हिस्से को भी जनजातीय दर्जा मिलेगा।
सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र में रहने वाले हाटी समुदाय के लोग पांच दशक से एसटी का दर्जा मांग रहे थे। इसके लिए समुदाय के लोगों ने कई आंदोलन और प्रदर्शन किए। गिरिपार क्षेत्र के लोगों जैसी संस्कृति, परंपराओं और परस्पर संबंधों वाले उत्तराखंड के जौनसार बावर क्षेत्र के लोगों को 1967 में ही यह दर्जा दे दिया गया था। प्रदेश सरकार ने मई 2005 में इसका प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था।
अगस्त 2011 में हाटी समुदाय की संस्कृति और स्थिति पर नई रिपोर्ट बनाने का काम शुरू हुआ। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 4 अगस्त 2018 को केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री के समक्ष भी यह मामला उठाया। केंद्र से इस विषय पर ताजा एथनॉग्राफिक प्रस्ताव मांगा गया। एथनॉग्राफी का मतलब किसी समुदाय के रहन-सहन, खान-पान, संस्कृति और परंपराओं के अध्ययन से है।
राज्य सरकार ने नया एथनॉग्राफिक प्रस्ताव तैयार कर केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय को भेजा। मुख्यमंत्री ने एक बार फिर 10 मार्च 2022 को केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र भेजकर आग्रह किया कि रजिस्ट्रार ऑफ इंडिया को हाटी समुदाय को एसटी का दर्जा देने के प्रस्ताव पर विचार करने के निर्देश दिए जाएं।
मुख्यमंत्री ने इस संबंध में 11 मार्च 2022 को केंद्रीय गृह मंत्री से भी भेंट की। इसके बाद अप्रैल 2022 में रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया ने ट्रांसगिरि क्षेत्र में रहने वाले हाटी समुदाय को एसटी में शामिल करने की सहमति दे दी। अब बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने भी इसकी मंजूरी दी।