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HAS: मुश्किलों को पार कर कैसे बनाई तकदीर?

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सोलन जिले के अर्की निवासी एवं स्कूल प्रवक्ता नरेश वर्मा एचएएस परीक्षा में 10वां स्थान लेकर एचपीएस वर्ग में पहले स्थान पर रहे हैं। मूल रूप से दाड़लाघाट के सनयाड़ी मोड़ के रहने वाले नरेश वर्मा सीनियर सेकेंडरी स्कूल में दाड़लाघाट में गणित विषय के प्रवक्ता हैं। शिक्षा क्षेत्र में 17 साल के लंबे कार्यकाल के बाद नरेश कुमार को तीसरे अटेंप्ट में यह सफलता मिली।
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नरेश कुमार ने बताया कि एचपीएस बनाने का सपना उनके माता-पिता का था। आज उन्होंने उनका सपना पूरा किया है। बताया कि उन्हें इस बात का अफसोस है कि आज इस सपने को देखने के लिए उनके माता-पिता उनके साथ नहीं हैं। कहा कि जो अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहते हैं, उन्हें अवश्य सफलता मिलती है।

थोड़े से धैर्य, आत्मविश्वास और मन लगाकर पढ़ाई की जाए तो तय लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल नहीं होता। हां थोड़ी देर अवश्य लग सकती है। हिमाचल स्कूल प्रवक्ता संघ ने नरेश वर्मा की सफलता पर उन्हें बधाई दी है।
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संघ के प्रधान नरोत्तम ठाकुर और महासचिव राजेंद्र ठाकुर ने बताया कि नरेश वर्मा ने संघ के जिला सोलन के प्रधान रहते हुए शिक्षकों के हित में कई कार्य किए और संघर्ष में हर मोड़ पर साथ दिया। इसके अलावा संघ के अन्य सहयोगियों ने भी उन्हें उनकी सफलता पर बधाई दी है।

पहले तहसीलदार, फिर एचएएस टॉपर बनीं डेंटल डॉक्टर

मेहनत और लगन से ही मुकाम हासिल किया जा सकता है। साथ में किस्मत का सही होना भी जरूरी है। मेहनत भी तभी होती है, अगर किस्मत सही हो। दोनों एक सिक्के के दो पहलू हैं। दोनों का रोल फिफ्टी-फिफ्टी रहता है। यह मानना है एचएएस की टॉपर शिखा शर्मा का। शिखा शर्मा पहले डेंटल डॉक्टर बनीं और उसके बाद तहसीलदार।

अब उन्होंने एचएएस की परीक्षा में टॉप किया है। शिखा शर्मा मूल रूप से हमीरपुर की निवासी हैं और शिमला के चक्कर में रहती हैं। शिखा शर्मा वर्तमान में अर्की में तहसीलदार सेटलमेंट हैं। मैट्रिक तक उनकी पढ़ाई बीएनएस चक्कर में हुई। उसके बाद जमा एक और जमा दो की कक्षा में दयानंद पब्लिक स्कूल शिमला की छात्रा रहीं। उन्होंने पहले डेंटल कॉलेज शिमला से बीडीएस की।

वर्ष 2010 से एचएएस की पढ़ाई शुरू की। वर्ष 2012 में हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा परीक्षा में पास होकर तहसीलदार बनीं। इसके बाद कोशिश फिर जारी रखी। इस बार एचएएस की परीक्षा को टॉप किया। शिखा शर्मा ने कहा कि इसके लिए उनके माता-पिता और गुरुजनों की प्रेरणा तो पहले से ही रही है। माता कृष्णा शर्मा गृहिणी हैं तो पिता अमरनाथ शर्मा बिजनेसमैन और ट्रांसपोर्टर रहे हैं।

दूसरी बार पास की है एसएएस परीक्षा

नौकरी के साथ-साथ पढ़ने का जुनून। कड़ी मेहनत और सच्ची लगन के दम पर शिलाई विस क्षेत्र की हलांह पंचायत के नागवा निवासी बाबूराम ने एचएएस परीक्षा में प्रदेश में दूसरा स्थान पाया है। वह दिन-रात परीक्षा की तैयारी में डटे रहे। इसी जज्बे के चलते आज उन्होंने एचएएस परीक्षा में दूसरा स्थान प्राप्त किया है।

बाबूराम शर्मा ने वर्ष 2006 में भी एचएएस परीक्षा पास की थी। इस बार एचएएस परीक्षा पास प्रदेश के 31 परीक्षार्थियों में से उनका दूसरा स्थान रहा। अमर उजाला से बातचीत में बाबूराम शर्मा ने बताया कि वह चार भाई और एक बहन हैं। वह सबसे छोटे हैं। उन्होंने नाहन के नवोदय विद्यालय से 12वीं एवं स्नातक पंजाब विश्वविद्यालय से की। दोनों कक्षाओं में प्रथम श्रेणी से पास हुए।

'फिजिक्स-मैथ से दूर न भागें'
नागवा गांव में एनआर शर्मा के घर जन्में बाबूराम शर्मा ने कहा कि कड़ी मेहनत और लगन से मुश्किल डगर भी आसान हो जाती है। आज की युवा पीढ़ी फिजिक्स और मैथ से दूर भाग रही है। एचएएस परीक्षा में उनके ऐच्छिक विषय यही दो विषय थे।
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बीडीओ रहते कायम की मिसाल

बाबूराम शर्मा वर्ष 2006 से 2008 तक कांगड़ा के लंबागांव, 2008 से 2011 तक पच्छाद और 2011 से 2014 तक सोलन में बीडीओ रहे हैं। जुलाई 2014 से वह किन्नौर में डीआरडीए में उप निदेशक हैं। उस दौरान संपूर्ण स्वच्छता अभियान में पच्छाद सिरमौर जिले में पहला ब्लॉक था, जो सबसे पहले खुला शौच मुक्त हुआ था।

22 साल की उम्र में बने बीडीओ
बाबूराम शर्मा ने 20 साल की उम्र में स्नातक परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। 22 वर्ष की उम्र में पहले ही चांस में एचएस परीक्षा पास कर तृतीय स्थान पाया। उस समय एचएएस का एकमात्र पद होने से उन्हें बतौर बीडीओ नियुक्ति मिली।
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