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Hamirpur News: गमले में उगाई हरड़, दो साल में मिला फल, नेरी महाविद्यालय ने पाई सफलता

Fri, 02 Jun 2023 12:34 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, रंगस (हमीरपुर)

सार

महाविद्यालय नेरी में वैज्ञानिकों ने बेहतर गुणवत्ता और उन्नत किस्म की हरड़ तैयार करने में सफलता हासिल कर ली है। ट्रायल के तौर पर हरड़ के पौधे पर वर्ष 1995 में पहली बार ग्राफ्टिंग करने में सफलता हासिल की थी। 
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गमले में उगाई हरड़ - फोटो : संवाद
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विस्तार
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 उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी में वैज्ञानिकों ने बेहतर गुणवत्ता और उन्नत किस्म की हरड़ तैयार करने में सफलता हासिल कर ली है। हरड़ को लेकर विश्वविद्यालय के तहत आने वाले जिला कांगड़ा में स्थापित अनुसंधान केंद्र जाछ नूरपुर में वर्ष 1989 में प्रदेश में पहली बार शोध कार्य शुरू हुआ था।  निरंतर शोध कार्य के चलते हरड़ की अनेकों किस्मों के पौधों पर ग्राफ्टिंग यानी प्यूंद करके कम से कम समय में फल देने वाले उत्तम किस्म के पौधों को विकसित करने का कार्य निरंतर चल रहा है। ट्रायल के तौर पर हरड़ के पौधे पर वर्ष 1995 में पहली बार ग्राफ्टिंग करने में सफलता हासिल की थी।

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वर्तमान समय में दो से पांच वर्ष तक यानी बहुत ही कम समय के अंतराल में हरड़ के पौधे से फल प्राप्त करने में वैज्ञानिकों ने सफलता हासिल कर ली है। जबकि, पूर्व में 12 या 15 वर्षों के बाद हरड़ के पौधे में फल आना शुरू होता था। यहां तक हरड़ का पौधा आकार में भी काफी बड़ा होता था। अब वैज्ञानिकों ने ग्राफ्टिंग से आकार में पांच या छह फीट के पौधे विकसित कर लिए हैं। वहीं. थोड़े अंतराल में ही फल प्राप्त करने में भी सफलता पाई है। अब तक अच्छी गुणवत्ता वारी और उन्नत किस्म की पांच तरह की किस्में विकसित कर ली गई हैं।

जिला हमीरपुर के अलावा ऊना, कांगड़ा और बाहरी प्रदेशों के किसानों को भी इस किस्म के पौधों को उपलब्ध करवाया गया है। इनमें अब फल आने भी शुरू हो गए हैं।   नेरी में वानिकी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं शोध कार्य में अग्रणी भूमिका अदा करने वाले वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कमल शर्मा ने कहा विश्वविद्यालय और महाविद्यालय नेरी में हरड़ की उन्नत किस्म के पांच प्रकार के पौधों पर शोध कार्य चल रहा है। हरड़ वैसे भी जलवायु प्रतिरोधी पौधा है तथा ट्रॉपिकल और सब ट्रॉपिकल रीजन में भी इसे लगाया जा सकता है। इसे बंदर व पशु भी खराब नहीं करते। 

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