डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर में एक करोड़ की लागत से ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के बावजूद कोरोना संक्रमित मरीजों को ऑक्सीजन युक्त वेंटिलेटर स्पोर्ट की सुविधा नहीं मिल रही। अभी भी हमीरपुर से टांडा और नेरचौक के लिए मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
रेफर करते समय मरीजों को समय पर एंबुलेंस भी नहीं मिल रही। ऑक्सीजन प्लांट के लोकार्पण के बाद भी तीन दिनों से गंभीर मरीजों को अन्य अस्पतालों के लिए रेफर करने का सिलसिला जारी है। मंगलवार को भी एक पुलिस कर्मचारी को हमीरपुर से नेरचौक के लिए रेफर किया गया है। वेंटिलेटर की सुविधा न मिलने से हमीरपुर में एक कोरोना संक्रमित भाजपा नेता की बीते सप्ताह मौत हो चुकी है।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 9 मई को शिमला से वर्चुअल माध्यम से मेडिकल कॉलेज में पीएसए ऑक्सीजन संयंत्र का लोकार्पण किया। लोगों का कहना है कि जल्दबाजी में लोकार्पण की क्या आवश्यकता थी, जब सुविधा नहीं मिल रही।
हमीरपुर के संयंत्र की क्षमता 300 पीएलएम है। एक करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पीएसए प्लांट 30 बिस्तरों वाले समर्पित कोविड वार्ड में निर्बाध ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा था कि यह वार्ड तीन माह के रिकॉर्ड समय में स्थापित किया गया है और मरीजों को निर्बाध ऑक्सीजन आपूर्ति प्रदान करने के लिए इसे 300 एलपीएम पीएसए प्लांट से जोड़ा गया है। सभी 30 बिस्तरों में ऑक्सीजन की सुविधा प्रदान की गई है और बीमार मरीजों के लिए 20 वेंटिलेटर स्थापित किए गए हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
उधर, इस बारे में मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि ऑक्सीजन प्लांट तो शुरू हो गया है, लेकिन जिस वार्ड में वेंटिलेटर स्थापित किए गए हैं, वहां पर कुछ काम शेष बचता है। अगर एक भी कोरोना संक्रमित मरीज वार्ड में शिफ्ट कर दिया तो टेक्नीशियन काम नहीं कर पाएंगे। शीघ्र सारा काम पूर्ण कर लिया जाएगा।
प्रदेश कांग्रेस के राज्य प्रवक्ता प्रेम कौशल ने कहा कि कोरोना संक्रमित मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने वाहवाही लूटने के लिए तीन दिन पहले ऑक्सीजन प्लांट का लोकार्पण करवा लिया। अभी तक मरीजों को नेरचौक और टीएमसी रेफर किया जा रहा है, जो चिंता का विषय है।