ख्वारा चौकी में जांच के दौरान वाहन से पकड़ा था 12.80 ग्राम चिट्टा संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। राजधानी शिमला में चिट्टे के एक मामले में अदालत ने राजन धालटा को दोषी करार देते हुए 3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी को 30 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
जुर्माना न देने पर एक साल का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना पड़ेगा। इसके अलावा अन्य आरोपी निखिल मांटा (कोटखाई) और कुलभूषण काल्टा (रोहड़ू) को कथित अपराध के आरोप से बरी कर दिया है।विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस) प्रवीण गर्ग की अदालत ने कोटखाई निवासी आरोपी राजन धालटा को एनडीपीएस अधिनियम के तहत दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई।
यह मामला 17 दिसंबर 2020 को बालूगंज थाना में पंजीकृत किया था। पुलिस के स्पेशल सेल की टीम संकट मोचन, तारादेवी और शोघी क्षेत्र में गश्त पर थीं। दोपहर 2 बजे पुलिस ने ख्वारा चौकी के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवाजाही कर रहे एक वाहन को जांच के लिए रोका। वाहन में तीन युवक सवार थे। इसमें चालक निखिल, आगे राजन और पीछे की सीट पर कुलभूषण बैठा था। दलील दी कि स्वतंत्र गवाह की मौजूदगी में वाहन की तलाशी ली गई। आगे की सीट के फुटमैट के नीचे जांच में एक पॉलीथीन पैकेट (पोटली) में 12.80 ग्राम चिट्टा, एक वजन मापने की मशीन और एक फॉयल पेपर मिला। साथ ही गियर बॉक्स के पास दो जले हुए फॉयल पेपर और 10 रुपये के नोट मिले। इसके बाद बालूगंज थाना पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट की धारा 21, 29 के तहत कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से मामले को साबित करने के लिए 14 गवाहों के बयान दर्ज किए। दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी राजन धालटा को दोषी ठहराया है। इसके अलावा निखिल मांटा और कुलभूषण काल्टा के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं होने पर बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियुक्तों के विरुद्ध लगाए गए अपराध को उचित संदेहों से परे साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।