राशन डिपो में अब साढ़े अठारह लाख राशनकार्ड परिवारों को पहले की अपेक्षा और सस्ता राशन मिलेगा। जीएसटी लागू होने से दालों के दाम में गिरावट आई है। प्रदेश सरकार अगले महीने से उपभोक्ताओं को सात दालें देने जा रही है।
इसके टेंडर की फाइल सरकार के पास है। जीएसटी लागू होने के बाद सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है। सरकार ने सभी राशन डिपो और गोदामों को नए सॉफ्टवेयर में अपडेट कर दिया है।
उम्मीद लगाई जा रही है कि दालों के रेट 4 से 5 रुपये तक कम हो सकते हैं, जबकि केंद्र सरकार से मिलने वाले गेहूं और चावल उपभोक्ताओं को पहले तय रेट पर ही मिलेंगे।
प्रदेश सरकार ने बीते दो महीने उपभोक्ताओं को पसंद की दालें देने का फैसला लिया है। इसके बाद खाद्य आपूर्ति निगम ने 7 दालों के टेंडर आमंत्रित किए थे। खाद्य आपूर्ति निगम ने टेंडर की औपचारिकताएं और रेट फाइल कर फाइल अप्रूवल के लिए सरकार को भेजी थी। यह फाइल करीब 10-12 दिन से सरकार के पास पेंडिंग है।
सात दालों के अभी यह रेट किए हैं तय
दालें रेट
राजमा 50 रुपये
दाल चना 50 रुपये
मूंग 40 रुपये
मलका मसूर 40 रुपये
काली मसूर 40 रुपये
दो दालों के लिए अलग से बुलाए टेंडर
खाद्य आपूर्ति निगम ने पांच दालों के रेट फाइल कर दिए थे, जबकि दो दालों के रेट ज्यादा आ गए थे। इसके चलते सरकार ने इन दालों के अलग से टेंडर आमंत्रित किए थे।
जीएसटी लागू होने से डिपुओं में मिलने वाली दालों के रेट कम होंगे, जबकि गेहूं और चावल के दाम में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा- जीएस बाली, खाद्य आपूर्ति मंत्री
चूना कारोबारियों को अब लग रहा टैक्स में चूना
वहीं, पूरे देश में जीएसटी लागू होने के बावजूद चूना पत्थर कारोबारियों को चूना लग रहा है। जीएसटी लागू होने पर पूरे देश में एक ही टैक्स लगना था और एक टैक्स एक रिटर्न भरनी पड़ेगी, लेकिन, चूना खान के कारोबारियों पर विभिन्न प्रकार के टैक्स अभी भी लागू हैं। यहां पर चूना पत्थर पर अब भी अन्य टैक्स देने पड़ रहे हैं।
इसकी रिटर्न भी अलग-अलग भरनी पड़ रही है। ऐसे में जीएसटी सिर्फ छलावा साबित हो रहा है। हिमाचल में चूना पत्थर पर कई प्रकार के टैक्स हैं। पहले चूना पत्थर पर 5 फीसदी वैट और 2 फीसदी (सी फॉर्म पर) बाहरी राज्यों में भेजने पर सीएसटी लगता था। वैट अधिनियम के तहत चूना पत्थर नेगेटिव लिस्ट में रखा गया, जिस कारण हर बिक्री पर टैक्स देना पड़ता था।
इस कारण यहां के उद्योग राजस्थान से चूना पत्थर खरीदने को मजबूर थे। जीएसटी लागू होने के बाद यहां के कारोबारियों को उम्मीद थी कि अब एक टैक्स और एक रिटर्न होगी, लेकिन इसके बाद भी टैक्स कम नहीं हुआ। चूना पत्थर को 5 फीसदी में रखा गया है और नेगेटिव लिस्ट से बाहर है, लेकिन इसके बावजूद व्यवसायियों को चूना पत्थर पर जीएसटी के अलावा एजीटीसी और सीजीसीआर देना पड़ रहा है। रिटर्न भी जीएसटी और एजीटीसी अलग-अलग भरनी पड़ रही है।
इसके अलावा की चूना पत्थर पर कई प्रकार का टैक्स सरकार को देना पड़ रहा है। एजीटीसी और सीजीसीआर समाप्त करने के लिए चैंबर ऑफ कॉमर्स पांवटा और सिरमौर माइन ओनर एसोसिएशन सतौन ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है।
उधर, जिला सिरमौर के अतिरिक्त आयुक्त आबकारी एवं कराधान विभाग गणेश दत्त ठाकुर ने बताया कि जीएसटी आने के बाद भी एजीटीसी और सीजीसीआर को नहीं हटाया गया है। ई-डिक्लेरेशन फॉर्म तब तक रखा गया है, जब तक जीएसटी का ई वे बिल नहीं आता। ये सरकार की गाइडलाइन के अनुसार है।
सरकार को चूना पत्थर से ऐसे मिलता है राजस्व
जीएसटी 5 फीसदी
एजीटीसी 29 रुपये प्रति मीट्रिक टन
सीजीसीआर ( फिनिशड गुड्स) 7 रुपये प्रति मीट्रिक टन
रॉयल्टी 80 रुपये (नॉन एलडी)
और 90 रुपये (एलडी)
नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट
रॉयल्टी का 2 फीसदी 1 रुपये 60 पैसे प्रति मीट्रिक टन
डिस्ट्रिक्ट मिनरल्स एक्सप्लोरेशन
ट्रस्ट रॉयल्टी का 30 फीसदी 24 रुपये प्रति मीट्रिक टन
ई डिक्लेरेशन फॉर्म 10 रुपये प्रति ट्रिप