सुविधाओं के अभाव के बीच एक स्कूल में नेशनल खिलाड़ी तैयार हो रहे हैं। 12 साल में इस स्कूल के 74 खिलाड़ी जूडो और कुश्ती में स्टेट और नेशनल में दमखम दिखा चुके हैं। हर बार खिलाड़ी हिमाचल की झोली में तीन से चार मेडल डाल देते हैं। जिक्र कर रहे हैं बिलासपुर के बरमाणा स्थित पंजगाईं स्कूल का।
कुश्ती के अभ्यास के लिए स्कूल में अखाड़ा तक नहीं। दो साल पहले स्कूल को मैट मिली है। इसके अलावा स्कूल में खिलाड़ियों के लिए किसी तरह के उपकरण नहीं हैं। इस साल स्कूल से 15 लड़कियों ने नेशनल जूडो में और पांच ने कुश्ती में नेशनल खेला। स्कूल के दो लड़कों ने जूडो में नेशनल और सात ने कुश्ती में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है। हर साल करीब 10 से ऊपर स्कूल के खिलाड़ी स्टेट और नेशनल प्रतियोगिता के लिए जाते हैं।
हर बार खिलाड़ी मेडल भी जीतकर लाते हैं। बच्चों की प्रतिभा देख अभिभावक यहां कुश्ती और जूडो का प्रशिक्षण केंद्र खोलने की कई बार मांग कर चुके हैं। स्कूल प्रधानाचार्य अश्वनी गुप्ता का कहना है कि खिलाड़ी स्कूल और प्रदेश का नाम चमका रहे हैं। एसएमसी प्रधान छोटा राम का कहना है कि स्पोर्ट्स हॉस्टल का मामला हर सरकार के सामने उठा चुके हैं। अभी तक सकारात्मक जवाब नहीं मिला है।
दो गोल्ड, चार रजत, 20 कांस्य पदक जीते
स्कूल के खिलाड़ी अब तक नेशनल में 26 मेडल प्रदेश की झोली में डाल चुके हैं। 12 साल के अरसे में दो गोल्ड, चार रजत और बीस कांस्य पदक जीतकर खिलाड़ियों ने प्रदेश का मान बढ़ाया है।
तो निकलेंगे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
स्कूल के शारीरिक शिक्षक और अंतरराष्ट्रीय पहलवान रह चुके जगदीश कुमार का कहना है कि खिलाड़ियों में प्रतिभा की कमी नहीं। अगर सरकार सुविधाएं उपलब्ध करवाए तो यहां से अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी निकल सकते हैं। लड़कियों के लिए हॉस्टल खोला जाना चाहिए।
सरकार के समक्ष रख चुके हैं मामला
असिस्टेंट डायरेक्टर शारीरिक शिक्षा प्रीतम धौंटा का कहना है कि खिलाड़ियों की सुविधाओं को लेकर सरकार के समक्ष बात रख चुके हैं। अगर बच्चों के अभिभावक इस बारे में शिक्षा मंत्री से बात करें तो यहां पर सुविधाएं मिल सकती हैं।